गोंडा : एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म हुआ। घटना के सात माह बाद मुकदमा दर्ज हो सका। आरोपितों पर कार्रवाई की गुहार करने के लिए वह थाने से लेकर जिला मुख्यालय और राजधानी तक दौड़ लगाती रही। इसके बाद भी उसे न्याय की आस पूरी होती नजर नहीं आई। घटना गत वर्ष 16 फरवरी की है। एफआइआर सात अगस्त को दर्ज हुआ। 20 अगस्त को ही कोतवाली कर्नलगंज के विवेचनाधिकारी ने अंतिम रिपोर्ट लगाते हुए आरोपितों को क्लीनचिट दे दी। मुकामी पुलिस की इस कारगुजारी की शिकार पीड़िता न्याय की आस लिए मुख्यमंत्री के दरबार पहुंची। वहां मुलाकात न हो पाने की दशा में 15 सितंबर को आत्मदाह का प्रयास किया। इसपर तत्कालीन एसपी ने विवेचना क्राइम ब्रांच के निरीक्षक परमानंद तिवारी को सौंपी। इन्होंने भी पूर्व की एफआर पर ही अपनी मुहर लगा दी। ऐसे में दोनों पर अब कार्रवाई करनी पड़ी। कोतवाल वेद प्रकाश श्रीवास्तव को भी जवाबदेह मानते हुए हटा दिया गया है। अब विवेचना मनकापुर के कोतवाल अशोक कुमार ¨सह को सौंपी गई है। एसपी ने कहाकि साक्ष्य के आधार पर पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप