गोंडा : जिले की नदियों के जलस्तर में भले ही कमी आ रही हो, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें नहीं कम हो रहीं। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। फसलें सड़ चुकी हैं। लोग अभी भी तटबंध पर ही शरण लिए हैं।

परसपुर संवादसूत्र के अनुसार क्षेत्र के चरसड़ी, नरायनपुर जै¨सह, शिवगढ, रायपुर, बहुअन मदार मांझा, नंदौर, चंदापुर किटौली, पसका उल्टहवा मांझा, बरुहा मांझा व इकनिया मांझा जहां बाढ़ के पानी से पूरी तरह से घिरे हुए हैं वहीं तीन पुरवे आंशिक रूप से प्रभावित हैं। राहत केंद्र पर तैनात कर्मी केंद्र छोड़ गांवों में जाना जरूरी नहीं समझते। पानी से घिरे होने के चलते लोग नाव के अभाव में केंद्र तक नहीं आ पा रहे है। बरुहा मांझा के महराजदीन ने कहा कि उनके घर में कई लोग बीमार हैं। इसी गांव के रामसमुझ ने बताया कि वह उल्टी -दस्त से परेशान हैं, लेकिन इलाज नहीं हो पा रहा है।

उमरीबेगमगंज संवादसूत्र के अनुसार जलस्तर घटने के बाद सामान्य हो रहे जनजीवन के बीच बीमारियों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। बाढ़ चौकी ऐलीपरसौली में वायरल फीवर से परेशान 50 मरीजों को दवा वितरित की गयी। यहां स्वास्थ्य पर्यवेक्षक देवमणि दुबे मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जुकाम बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। डॉक्टर यहां मौजूद नहीं रहते।

तरबगंज संवादसूत्र के अनुसार नदियों के घटने का सिलसिला जारी है। तहसील में तैनात आपदा पटल प्रभारी हरिओम ने बताया कि क्षेत्र में संचालित 174 नावों के सापेक्ष चौबीस घंटे के भीतर 102 नावों को बाढ़ का पानी घटने से हटाया गया है। प्रभावित 37 राजस्व गांवों में से 20 सामान्य स्थिति में आ गए हैं। उन्होंने बताया कि माझाराठ, तुरकौलिया, दुल्लापुर, गोकुला, इंदरपुर, पूरे अंबर, दत्तनगर सहित कुल 20 गांव से बाढ़ का पानी हट गया है।

कर्नलगंज संवादसूत्र के अनुसार बाढ़ क्षेत्र में अब बीमारियों ने पैर पसारना शुरू कर दिया है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुरेश चंद्रा ने बताया कि दवाएं उपलब्ध हैं।

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