जागरण संवाददाता, दुल्लहपुर (गाजीपुर) : छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पिछले चार अप्रैल को हुए नक्सली हमले में शहीद हुए 22 जवानों के गम में पूरा देश भले ही शोक में डूबा है, मगर कुछ ऐसे भी जवान हैं जिन्हें छूकर मौत गुजर गई, लेकिन कर्तव्य से उनके कदम पीछे नहीं हटे। शहीदों की धरती के रूप में गिने जाने वाले गांव धामूपुर के निवासी कोबरा जवान हरेंद्र यादव तथा उसी गांव के बगल में स्थित सराय धनेश गांव निवासी एसटीएफ के जवान प्रदीप सिंह भी उस मुठभेड़ में शामिल थे। जागरण प्रतिनिधि से मोबाइल फोन द्वारा हुई वार्ता में उन्होंने उस मुठभेड़ की आंखों देखी कहानी बयां की।

बताया कि वासागुणा स्थित कैंप में जब वह ड्यूटी पर तैनात थे तो नक्सलियों के आने की आहट की मिली। इसके बाद वह अपनी टीम के साथ नक्सलियों की टोह लेने घने जंगल की तरफ कांबिग में चल दिए। कांबिग करने वालों में सिविल, एसटीएफ, कोबरा तथा डीआरजी के जवान शामिल थे। आगे बताया कि जब सभी जवान काम्बिग कर ड्यूटी से वापस आ रहे थे तो पहाड़ी पर सुस्ताने के लिए थोड़ी देर रुकना चाहते थे। अभी वह पहाड़ी पर रुकने की सोच ही रहे थे कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने सभी जवानों को यू आकार में घेर लिया। उन्होंने हम लोगों पर फायरिग करने के साथ बम से हमला करना शुरू कर दिया। हमारे दाएं-बाएं और सिर के ऊपर से गोली निकल रही थी, लेकिन संयोग अच्छा था कि हम लोगों को नहीं लगी। इस घटना में डिप्टी कमांडेंट कोबरा भी बम लगने से घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में कई नक्सलियों को मार गिराया गया। छह से सात घंटे चली मुठभेड़ के बाद अब नक्सलियों को लगने लगा कि जवानों के कदम पीछे नहीं हटेंगे तो उन्होंने वहां से भागने में ही अपनी भलाई समझी।

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जंगलों में रहने के अभ्यस्त हैं नक्सली

: हरेंद्र यादव ने बताया कि घने जंगल में सड़कें नहीं हैं, लेकिन नक्सली उसमें रहने के अभ्यस्त हैं। वह ऐसे मौकों की ही तलाश में रहते हैं। मुठभेड़ के दौरान घायल साथियों को उपचार के लिए हेलीकाप्टर से बीजापुर भेजा गया। रास्ता न होने से हम लोगों को काफी दिक्कतें आ रही थीं, लेकिन 22 जवानों की शहादत के बाद भी हम लोगों का हौसला नहीं डिगा और संसाधनों की कमी के बावजूद भी हौसले के सहारे नक्सलियों से लड़ते रहे।

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नक्सलियों के पास भी था अत्याधुनिक हथियार

: हरेंद्र यादव ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान उन्हें आश्चर्य तब हुआ जब नक्सलियों के पास भी अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा देखने को मिला। इससे नक्सली जवानों पर जोरदार हमला कर रहे थे। सीजीआरएल तथा ओबीजीएल जैसे हथियार भी नक्सलियों के पास थे। यह हथियार उनके पास कैसे पहुंचे, यह जांच का विषय है।

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अपने हाथों से उठाए बलिदानियों के शव

- हरेंद्र यादव ने बताया कि इस हमले में बलिदान हुए साथियों के शव हम लोगों ने अपने हाथों से उठाया। गोलियों से छलनी शवों को देख कलेजा छलनी हो गया, लेकिन हाथ नहीं कांपे। बलिदानियों को कंधा देने के साथ घायल जवानों को उठाकर उपचार के लिए ले जाने आए हेलीकाप्टर तक पहुंचाया।

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