गाजीपुर : अयोध्या प्रकरण पर लंबी लड़ाई के बाद हमारे सर्वधर्म समभाव खोदाई में मिले साक्ष्यों, विदेशी यात्रियों और पुरातात्विक प्रमाणों के आलोक में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति से निर्णय देकर देश की एकता व अखंडता की रक्षा की है। न्यायपालिका ने सभी पक्षों के तर्कों और प्रमाणों की गहराई से छानबीन करके निष्कर्ष निकाला है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांट दिया था, कितु इससे कोई पक्ष संतुष्ट नहीं था और सभी ने अपील की थी। नौ वर्षों की जद्दोजहद तथा तीन नामित पंचों द्वारा कोई सर्वमान्य हल न निकाल पाने के बाद चालीस दिनों तक चले प्रतिदिन सुनवाई के बाद मात्र 22 दिन में एक हजार 45 पृष्ठों का संतुलित निर्णय देकर भारतीय न्यायपालिका ने अपनी स्वतंत्रता, शुचिता व गरिमा की रक्षा की है। शिया वक्फ बोर्ड व निर्मोही अखाड़े को बाहर का रास्ता दिखाकर सुन्नी वक्फ बोर्ड व रामलला विराजमान के बीच विवाद को केंद्रित कर दोनों पक्षों की हर बात और प्रमाणों को तर्क, कानून और संविधान के आधार पर नकारा और स्वीकारा है। निर्णय के बाद आम नागरिकों में प्रसन्नता है। इससे देश में अखंडता व भाईचारा की भावना बढ़ेगी। कुछ को छोड़कर सभी राजनीतिक दल और सामाजिक संगठनों ने भी संतोष व्यक्त किया है। आवश्यकता है, हम सभी न्यायपालिका के निर्णय का सम्मान करें और सौहार्द एवं देशप्रेम की भावना को और प्रगाढ़ करें ताकि देश में नया वातावरण विकसित हो।

- डा. मांधाता राय, पूर्व प्राचार्य-एसएस पीजी कालेज।

Posted By: Jagran

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