जासं, गाजीपुर : हमीद सेतु पर भारी वाहनों की रोक लगने के लिए ओवरलोड बालू का खेल एक बार फिर से शुरू हो गया है। जबकि हमीद सेतु पर भारी वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। जिलाधिकारी के. बालाजी का तबादला होते ही संबंधित लोग सक्रिय हो गए और रात करीब 10 बजे के बाद धड़ल्ले से अवैध बालू का यह खेल चल रहा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि ओवरलोड बालू लदे ट्रैक्टरों को पुलिस के संरक्षण में पास किया जा रहा है।

हमीद सेतु में खराबी के कारण बीते कई माह से पुल के दोनों तरफ हाइटगेज बैरियर लगाकर भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। ऐसे में खनन माफियाओं नया तरकीब निकाला और मेदनीपुर चट्टी पर ओवरलोड ट्रकों के बालू को ट्रैक्टर-ट्राली में भरवाकर नगरीय क्षेत्र में सप्लाई करते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कुछ ट्राली का साइज इतना बड़ा है कि उस पर तीन से चार सौ फिट बालू लोड हो जाता है। जबकि एनएचआइ जिला प्रशासन को आगाह भी कर चुका है कि पुल पर लोडेड वाहन चले तो खतरा हो सकता है, लेकिन स्थानीय पुलिस-प्रशासन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। बीते माह जिला प्रशासन ने दर्जनों ट्रकों पर कार्रवाई करते हुए बालू को भी सीज कर दिया था, लेकिन जिलाधिकारी के. बालाजी का तबादला होते हुए खनन माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। कालूपुर चट्टी पर तीन से चार तो रजागंज पुलिस चौकी पर भी इतने पुलिसकर्मी हमेशा तैनात रहते हैं। एक ट्राली पर इनका कमीशन भी फिक्स कर दिया गया है, जो समय से इनके यहां पहुंच जाता है। नहीं तो रात 10 बजे के बाद सुनसान रहने वाली रजागंज पुलिस चौकी पूरी रात गुलजार नहीं रहती।

प्रशासन का आदेश बन जा रहा अवैध कमाई का जरिया

- जिला प्रशासन के आदेश को भी अवैध कमाई का जरिया बना दिया जा रहा है। बाढ़ के समय भूसा वगैरह ले जाने के लिए डीएम के आदेश पर हाइटगेज बैरियर को खोला गया था। बाढ़ समाप्त भी हो गया, लेकिन हाइटगेज बैरियर उसी तरह लगा हुआ है। इसी का फायदा उठाते हुए देर रात धड़ल्ले से वाहनों को पास करा दिया जाता है। अगर यह अवैध काम नहीं होता तो रात के बजाए दिन में भी होता। वहीं अगर स्थानीय पुलिस की मिलीभगत नहीं होती तो एक लाइन इन ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राली को पास नहीं कराया जाता।

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: मामला हमारे संज्ञान में है। मैंने राजस्व निरीक्षक को एक दिन मौके पर भेजा भी था। काफी शिकायत मिल रही है। शीघ्र ही इस पर एक बार फिर से अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई जाएगी।

- रमेश मौर्या, उपजिलाधिकारी जमानियां।

Posted By: Jagran

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