जासं, गाजीपुर : स्वास्थ्य विभाग ने ई-विन सिस्टम एप (इलेक्ट्रानिक वैक्सीन इंटेलीजेंस नेटवर्क) की मदद से 25 लाख 93 हजार 975 रुपये की वैक्सीन खराब होने से बचाई है। डिस्ट्रिक वैक्सीन स्टोर व कोल्ड चैन प्वाइंट में हेपटाइटिस बी, पालियो, डीपीटी, रोटावायरस, बीसीजी, जेई, पेंटावेलेंट समेत अन्य महंगी वैक्सीन सुरक्षित है। लॉकडाउन के दौरान टीकाकरण का कार्य बंद होने से इनके खराब होने का खतरा मंडरा रहा था, लेकिन तापमान निर्धारण मशीन व इस एप के जरिए बचाया जा सका।

नवजातों को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए समय-समय उन्हें विभिन्न टीका लगाया जाता है। इसके लिए सीएमओ कार्यालय स्थित जिला वैक्सीन स्टोर के साथ बाराचवर, भदौरा, बिरनो, देवकली, गौड़ऊर, जखनियां, करंडा, कासिमाबाद, मनिहारी, मरदह, मिर्जापुर, मुहम्मदाबाद, रेवतीपुर, सैदपुर, सुभाखरपुर, अंधऊ, जमानियां व अर्बन में वैक्सीन स्टोर किए जाने की व्यवस्था है। वैक्सीन को एक निश्चित तापमान (दो डिग्री से आठ डिग्री) पर रखा जाना जरूरी है। तापमान में होते बदलाव पर नजर रखने के लिए सभी स्टोर की मशीनों को ई-विन सिस्टम से जोड़ा गया है। कोरोना संकट के दौरान बीते 25 मार्च से लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद टीकाकरण का कार्य बंद हो गया। ऐसे में अब स्टोर किए गए वैक्सीनों को सुरक्षित रखने के लिए स्वास्थ्य कर्मी 24 घंटे एप के जरिए नजर रखे हुए थे।

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मोबाइल पर मिलने लगती है जानकारी

ई-विन सिस्टम एप द्वारा डिस्ट्रिक वैक्सीन स्टोर व कोल्ड चैन प्वाइंट पर तैनात किए गए स्वास्थ्य कर्मियों को घर बैठे ही मोबाइल पर पूरी जानकारी मिल जाती है। गर्मी के दिनों में इन वैक्सीनों को सुरक्षित रखना काफी चुनौती पूर्ण होता है। वजह निर्धारित तापमान में गिरावट या बढ़ोत्तरी होने से इनके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में जब भी तापमान में उतार-चढ़ाव होता है, वहां लगा सेंसर एप के जरिए स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट करता है।

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अब नवजातों का हो रहा टीकाकरण

करीब एक माह तक टीकाकरण कार्य बंद होने के बाद बीते दो मई से अब नवजातों को टीका लगाया जा रहा है। स्टोर में वैक्सीन सुरक्षित रहने के चलते किसी प्रकार की दिक्कत नहीं उठानी पड़ रही है। अगर वैक्सीन सुरक्षित नहीं रखा जाता तो नवजातों का टीकाकरण करने के लिए जहां वैक्सीन की खेप नए सिरे से मंगानी पड़ती, वहीं नवजातों का टीकाकरण नहीं हो पाता। -

कोरोना महामारी के दौरान बीते 25 मार्च से लॉकडाउन होने के बाद टीकाकरण कार्य बंद हो गया था। ऐसी स्थिति में स्टोर किए गए वैक्सीन को सुरक्षित रखना एक चुनौती थी, लेकिन ई-विन सिस्टम के जरिए लगातार एक माह तक इस पर नजर रखने के साथ 25 लाख से अधिक की वैक्सीन बचा ली गई।

- प्रवीण उपाध्याय, वैक्सीन मैनेजर ।

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