जासं, गाजीपुर : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में खाद्यान्न व दैनिक सामानों की निविदा को बार-बार निरस्त करने का मतलब साफ है कि ऐसा या तो किसी को लाभ देने के लिए किया जा रहा है या फिर किसी से द्वेष के कारण! अगर ऐसा नहीं होता तो दूसरी या फिर तीसरी बार एल-1 (सबसे कम बिल रेट वाली फर्म) के कारण निविदा निरस्त करने के बजाय, नियमत: एल-2 को कार्य दे दिया गया होता।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में खाद्यान एवं दैनिक सामानों की आपूर्ति के लिए फरवरी से अब तक एक नहीं, पांच बार निविदा प्रकाशित हो चुकी है। पहली बार 22 फरवरी को निविदा निकली, लेकिन अंतिम तिथि चार मार्च तक उसे खोला ही नहीं गया। दूसरी बार 26 जून को निविदा हुई तो दोनों में अलग-अलग नियम व शर्त लगा दिए गए। बावजूद इसके नियमों की नियमों की अनदेखी की गई और विद्यालय से संबंधित एक वार्डेन के पति के फर्म को कार्य सौंप दिया गया। जांच में मामला सही मिला तो निविदा ही निरस्त कर दी गई। इसी प्रकार 27 जुलाई को तीसरी बार निविदा प्रकाशित हुई। इसमें जिस फर्म को कार्य सौंपा गया, उसकी जांच हुई तो फर्म के कागजात ही फर्जी मिले। इसे मुख्य विकास अधिकारी ने जांच पकड़ा था। दूसरी बार की तरह इस बार भी एल-2 को कार्य सौंपने के बजाए निविदा ही निरस्त कर दी गई। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरीके से कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में खाद्यान्न व दैनिक सामान के आपूर्ति का टेंडर में जिम्मेदारों ने यह ठान लिया है कि अपने चहेते को ही देंगे। सबसे बड़ी आश्चर्य वाली बात तो यह है कि मामला डीएम व सीडीओ के संज्ञान में होने के बाद भी ऐसा हो रहा है।

Posted By: Jagran

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