जागरण संवाददाता, मलसा (गाजीपुर) : राधा-माधव ट्रस्ट सब्बलपुर में रविवार को आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में भागवताचार्य चंद्रेश महाराज ने कहा कि भगवान का कोई निश्चित नाम, रूप और धाम नहीं है अपितु भगवान भक्त के भाव के वश में होकर कोई भी रूप धारण कर लेते हैं। परिस्थितियों के अनुसार और भक्तों की टेक को पूरा करने के लिए भी भगवान के अनेक अवतार हुए हैं और आगे भी समय समय पर होते रहेंगे। ऐसा वेद, पुराण और संतों का कहना है। समुद्र मंथन के समय परिस्थिति विशेष में मोहिनी अवतार हुआ तो प्रह्लाद की आस्था और हिरण्यकशिपु को मिले वरदान की मर्यादा को रखने के लिए नरसिंह रूप में प्रकट होना पड़ा। धर्म की स्थापना एवं सज्जनों की रक्षा के लिए भगवान अनेक रूपों में अवतार लेते रहते हैं।

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