'चूहे की बीट कौन खाएगा...' राशन की दुकान से मिला घटिया चावल लेकर गाजीपुर DM दफ्तर पहुंचा शख्स
गाजीपुर के मठ उचौरी गांव में कोटे से मिले घटिया राशन की शिकायत डीएम अनुपम शुक्ला के जनता दरबार पहुंची।

चूहे के मल मिले हुए चावल के साथ के साथ डीएम जनता दरबार में बैठा शिकायतकर्ता
HighLights
घटिया कोटे के चावल की शिकायत डीएम दरबार में।
चावल में चूहे की लीद, प्लास्टिक और कचरा मिला।
डीएम ने जांच और कार्रवाई का दिया आश्वासन।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। सैदपुर ब्लॉक के मठ उचौरी गांव में कोटे से मिले घटिया राशन का मामला सोमवार को डीएम अनुपम शुक्ला के जनता दरबार पहुंच गया। शिकायतकर्ता पन्नालाल विश्वकर्मा ने कोटे से मिला खराब चावल डीएम को दिखाया।
सवाल किया कि राशन में चूहे की लीद (बीट), प्लास्टिक और कचरा मिला हो तो इसे कौन खाएगा? उन्होंने कम खाद्यान्न बांटने और घटिया देने की शिकायत के बावजूद पूर्ति विभाग के अधिकारियों के स्तर से कोटेदार गुलाब राम के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।
पन्नालाल के अनुसार अप्रैल में कोटेदार की ओर से वितरित चावल में मिट्टी, कंकड़-पत्थर, प्लास्टिक के टुकड़े, रस्सी और चूहे की लीद मिली थी। खाद्य एवं रसद विभाग, एसडीएम, डीएम और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर साक्ष्यों के साथ शिकायत की थी। आरोप है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई।
करीब 20 ग्रामीणों के फर्जी हस्ताक्षर कर रिपोर्ट तैयार कर दी गई। पूर्ति निरीक्षक श्याममोहन सिंह ने चावल का नमूना लेकर जांच और लैब परीक्षण की बात कही थी, लेकिन कोटेदार का महज 500 रुपये का चालान किया।
आरोप लगाया कि रिपोर्ट में 50 लोगों से संपर्क करने का दावा किया गया। यदि अधिकारी वास्तव में गांव में जांच करने पहुंचे थे तो संबंधित अवधि की मोबाइल लोकेशन और काल डिटेल से इसकी पुष्टि की जा सकती है।
डीएम अनुपम शुक्ला ने इसके गंभीरता से लेेते हुए पूर्ति अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। आश्वासन दिया कि राशन डीलर व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
समझौते के लिए सोलर लाइट का प्रलोभन देने का आरोप
पन्नालाल ने यह भी आरोप लगाया कि जिला पूर्ति अधिकारी ने शिकायत वापस लेने और मामले में समझौता करने के लिए करीब 1.20 लाख रुपये की सोलर लाइट दिलाने का प्रलोभन दिया गया।
उन्होंने डीएम से तहसील स्तरीय पूर्ति विभाग से जांच हटाकर स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने, खाद्यान्न की लैब रिपोर्ट सार्वजनिक करने और कथित फर्जी हस्ताक्षर व जांच रिपोर्ट की सत्यता की पड़ताल कराने की मांग की है।
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