बीमा क्लेम खारिज करना पड़ा महंगा, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को देना होगा 40 हजार व ब्याज
जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को भैंस का बीमा क्लेम खारिज करने पर 40 हजार रुपये और ब्याज देने का आदेश दिया है।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। बीमित भैंस के टैग नंबर में अंतर को आधार बनाकर बीमा क्लेम खारिज करना यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को महंगा पड़ा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने केदार यति के परिवार का परिवाद स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को 40 हजार रुपये की बीमा राशि सात प्रतिशत साधारण ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।
ब्याज की गणना परिवाद दाखिल करने की तिथि से होगी। आयोग ने कंपनी को आर्थिक व मानसिक क्षति के लिए पांच हजार तथा वाद खर्च के पांच हजार रुपये भी देने को कहा है। आदेश का पालन दो माह के भीतर करना होगा।
यह है पूरा मामला
मामला जखनिया तहसील के चक फातिमा गांव का है। केदार यति ने काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक, भुड़कुड़ा से 40 हजार रुपये का ऋण लेकर दुधारू भैंस खरीदी थी। इसका बीमा यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था।
भैंस की जुलाई 2016 में मृत्यु के बाद बैंक के माध्यम से बीमा कंपनी को सूचना दी गई और क्लेम प्रस्तुत किया गया। कंपनी ने मई 2017 में दावा निरस्त कर दिया। उसका तर्क था कि बीमित पशु का टैग नंबर 18951 था, जबकि मृत भैंस के टैग की पहचान स्पष्ट नहीं थी और दावा संदिग्ध था।
आयोग ने उपलब्ध पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बैंक के प्रमाण पत्र, क्लेम फार्म और जांचकर्ता की रिपोर्ट का परीक्षण किया। इनमें मृत भैंस का टैग नंबर 1895 दर्ज था।
आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी के जांचकर्ता ने भी अपनी रिपोर्ट में 1895 का उल्लेख किया, लेकिन कहीं यह नहीं कहा कि मृत पशु का टैग बीमा पालिसी से अलग है। बीमा कंपनी ने यह साबित करने वाला कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया कि पालिसी में 18951 दर्ज होने का आधार क्या था।
आयोग ने इसे रिकार्ड दर्ज करने की विसंगति माना और कहा कि इससे यह साबित नहीं होता कि मृत भैंस अलग पशु थी। इसी आधार पर क्लेम खारिज करना सेवा में कमी माना गया और परिवाद स्वीकार कर लिया गया।
