जागरण संवाददाता, गाजीपुर : देश के प्रथम राष्ट्रपति व भारत रत्न से सम्मानित डा. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर श्री चित्रगुप्त वंशीय सभा के सदस्यों ने शहर के राजेंद्र नगर स्थित डा. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। ददरीघाट स्थित चित्रगुप्त मंदिर परिसर में भारतीय संविधान के निर्माण में डा. राजेंद्र प्रसाद का योगदान विषयक का आयोजन हुआ। वक्ताओं ने तथ्यों व तर्कों के आधार पर यह प्रमाणित करने का प्रयास किया कि संविधान के निर्माण में डा. प्रसाद की भूमिका डा. भीमराव अंबेडकर से ज्यादा रही है। आरोप लगाया कि राजनीतिक दल व सरकारें राजनीतिक कारणों से राजेंद्र प्रसाद की अनदेखी करते आ रहे हैं। शिवशंकर सिन्हा ने कहा कि संविधान निर्माण में पूर्व राष्ट्रपति की भूमिका को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। नीरज श्रीवास्तव, शमशेर बहादुर श्रीवास्तव, यशोवर्धन श्रीवास्तव, सुनील दत्त श्रीवास्तव, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, विभोर श्रीवास्तव, संदीप श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, डा. प्रमोद अनंग, प्यारे मोहन श्रीवास्तव, दिनेश श्रीवास्तव आदि थे। अध्यक्षता आनंद शंकर श्रीवास्तव ने किया।

खानपुर : शिक्षण संस्थानों में देश के प्रथम राष्ट्रपति व भारतरत्न डा. राजेंद्र प्रसाद की जयंती मंगलवार को मनाई गई। बभनौली स्थित जनता इंटर कालेज में प्रधानाचार्य अनिल पांडेय ने कहा कि भारत रत्न डा राजेंद्र प्रसाद के छात्र जीवन में परीक्षक ने उनकी कॉपी देखकर कहा था कि परीक्षार्थी परीक्षक से बेहतर हैं। प्रसाद जी भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के महान नेता थे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उन्होंने कई देशों की सद्भावना यात्रा की। उन्होंने एटमी युग में शांति बनाए रखने पर भी जोर दिया। देश के सर्वोच्च पद पर रहते हुए जिस सादगी, सरलता व संस्कार उन्होंने जीवन यापन किया वह आज के राजनीतिज्ञों के लिए अनुकरणीय है। प्रबंधक मधुसूदन पांडेय, भोला पांडेय, शमशेर पांडेय, कन्हैया पांडेय आदि थे।

Posted By: Jagran

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