जासं, गाजीपुर : जिले में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटरों पर मनमानी हो रही है। खानपान में भी लापरवाही बरती जा रही है। दूध न मिलने से बच्चे रो रहे हैं। इसकी शिकायत करने के बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। केवल पूड़ी व सब्जी ही परोसी जा रही है। इसे लेकरक्वारंटाइन सेंटरों में रह रहे लोगों में आक्रोश पनप रहा है। वहीं कई गांवों में बाहर से आए लोग बिना जांच कराए ही घूम रहे हैं। ऐसे में गांवों में भी तेजी से कोरोना फैल सकता है।

जमानियां : राजकिशोर सिंह महाविद्यालय के आश्रय केंद्र में क्वारंटाइन किए गए 50 लोगों को प्रशासन की ओर से केवल पूड़ी सब्जी खिलाने तथा 11 छोटे बच्चों को दूध न मिलने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बीते 11 मई को मुंबई से ऑटो में पहुंचे 30 लोगों को यहां बनाये गए आश्रय स्थल भेजा गया। वहां सभी का स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच कराई गई। अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आने से सभी लोग केंद्र पर है। केंद्र पर 20 क्षेत्र के गरुआ मकसूदपुर और 10 लोग बयेपुर देवकली और अन्य 20 लोग अन्य गांवों के हैं। गरुआ मकसूदपुर निवासी मुन्ना चौधरी ने बताया कि 30 लोग मुंबई से ऑटो में गांव को जा रहे थे। इसी बीच पुलिस ने पकड़ लिया। आश्रय केंद्र पर केवल पूड़ी सब्जी मिलने से परेशानी हो रही है। 11 बच्चों को दूध की भी कोई व्यवस्था नहीं है। केवल 11 मई को दूध मिला था। कई बार चावल-दाल की मांग की गई लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। बच्चे दूध के बिना रो रहे हैं। तहसीलदार आलोक कुमार ने बताया बरुईन गांव स्थित आश्रय स्थल में 50 लोगों को क्वारंटाइन किया गया है। सभी लोगों को चावल-दाल, सब्जी और बच्चों को दूध देने का निर्देश दिया गया है।

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बिना स्वास्थ्य परीक्षण कराए

ही घरों में रह रहे लोग

बहरियाबाद : स्थानीय कस्बा सहित क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में पिछले कुछ दिनों से बाहर रह रहे प्रवासियों की काफी संख्या में घर लौटने से लोग भयभीत हैं। बगैर चिकित्सकीय परीक्षण कराए ही कई लोग घरों में रह रहे हैं। कुछ बाहर घूम भी रहे हैं। स्थानीय कस्बा निवासी वसीम अंसारी कोलकाता से घर आए। उन्होंने स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया। यही हाल नागा, फैयाज, टिलठू व चकसदर निवासी रामकिशुन, इनरू व अन्य दर्जनों का है। जब मोहल्ले के लोगों ने दबाव बनाया तो बुधवार को वे परीक्षण कराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मिर्जापुर गए। अभी भी कस्बा सहित क्षेत्र के अन्य गांवों में ऐसे लोग काफी संख्या में महानगरों से लौटे हैं जो घरों में छिपे हुए हैं।

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समाजसेवी ने कराई बागीचा

में क्वारंटाइन की व्यवस्था

जखनियां : क्षेत्र के मीरपुर गांव के लोग समाजसेवी अजीत सिंह की देखरेख में संगठित होकर बाहर से आने वालों को बिना भेदभाव के गांव के पास बगीचे में खानेपीने व रहने की पूरी व्यवस्था कर दी गई है। अजीत सिंह ने बताया कि बुधवार को पांच और युवक महानगरों से सीधे घर आने पर उनके परिजनों ने उन युवकों को बगीचे में भेजकर 21 दिन तक वहीं रहने की बात कही। इसी क्रम में बारोडीह गांव के जागरूक युवकों ने गांव में प्रवेश करने वाले सभी मार्गों को बांस-बल्ली से बंद कर दिया है। किसी को भी आने पर बिना उन्हें सैनिटाइज किए प्रवेश वंचित कर दिया है। साथ ही युवकों द्वारा पाली बनाकर निगरानी रखी जा रही है। बाहर से किसी भी आदमी को आने के लिए गांव का केवल एक रास्ता ही खुला है।

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घूम रहे बाहर से आए लोग

दुल्लहपुर : लॉकडाउन में दूसरे प्रदेशों से आए अधिकतर गांवों में लोग कोरोना की परवाह किए बगैर बेरोकटोक घूम रहे हैं। कुछ गावों में बाहर से आए लोग बगैर प्रशासन को सूचना दिये ही परिवार में रह रहे हैं। इसके चलते अन्य ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों की सूचना पर प्रशासन भी कोई रुचि नहीं ले रहा है। अधिक संख्या में आए लोगों को प्रशासन थर्मल स्कैनिग कराकर चिह्नित विद्यालय में क्वारंटाइन करा दे रहा है लेकिन लेकिन दो या चार की संख्या में आये लोग बगैर किसी सूचना के ही अपने घर चले जा रहे हैं। इस तरह की लापरवाही से कोरोना तेजी से फैल सकता है। ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर गांव के प्राथमिक विद्यालय पर ठहरे प्रवासियों के खाने पीने का कोई इंतजाम प्रशासन की तरफ से नहीं किया जा रहा है। सभी के परिवार की तरफ से खाना भेजा जा रहा है तब जाकर उनका पेट भर रहा है। क्षेत्र के धामूपुर, मलेठी, जफरपुर, बड़ागांव, जमसड़ा, जलालाबाद सहित कई गांवों में लोग बाहर से आये हैं। क्षेत्र के शारदा महाविद्यालय जलालाबाद में मंगलवार की देर शाम 70 लोगों को क्वारंटाइन किया गया। भोजन की व्यवस्था में उनको सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन व शाम का नाश्ता व रात का भोजन रखा गया है जबकि बुधवार की सुबह उन लोगों के लिए केवल चाय ही मिली थी। जबकि प्रति व्यक्ति मिलने वाला खर्च 250 रुपये है।

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बाहर से आए लोगों की हुई थर्मल स्कैनिग

कासिमाबाद (गाजीपुर) : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कासिमाबाद पर बुधवार को अन्य प्रांतों से करीब 340 लोग पहुंचे। इसमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल थीं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डा. राजेश कुमार व उनकी टीम ने सभी लोगों की थर्मल स्कैनिग की। बाहर से आए लोगों की भीड़ दिन भर अस्पताल में लगी रही। डा. राजेश कुमार ने बताया कि बाहर से आए सभी लोग 21 दिनों तक घर में रहें। इस बीच किसी से न मिलें। सर्दी, जुकाम व बुखार आदि कोई भी लक्षण महसूस हो तो तुरंत सूचना दें। सभी का नाम, पता व मोबाइल नंबर दर्ज कर थर्मल स्कैंनिग करने के बाद हाथ पर मार्कर लगा होम क्वारंटाइन के लिए भेज दिया गया। डा. अमित कुमार, चीफ फार्मासिस्ट राजकुमार राय, बलिराम, जनार्दन, ईश्वर आदि थे।

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