गाजीपुर की एतिहासिक हवाई पट्टी का द्वितीय विश्वयुद्ध कनेक्शन, जापान से सैन्य खतरों के चलते ब्रिटेन ने बनाया था एयर स्टेशन
गाजीपुर की द्वितीय विश्वयुद्ध कालीन अंधऊ हवाई पट्टी को वाराणसी एयर शो के लिए अस्थायी वायुसेना स्टेशन के रूप में पुनर्जीवित किया गया है।

अंधऊ हवाई पट्टी एक बार फिर चर्चा में
HighLights
अंधऊ हवाई पट्टी द्वितीय विश्वयुद्ध में रणनीतिक जरूरतों के लिए बनी थी।
65 साल बाद वाराणसी एयर शो के लिए अस्थायी स्टेशन बनी।
भविष्य में क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में उपयोग की उम्मीद।
जागरण संवददाता, गाजीपुर। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापान के हमले के खतरे और पूर्वी भारत-बर्मा(अब म्यांमार) में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयार की गई अंधऊ हवाई पट्टी एक बार फिर चर्चा में है।
करीब 65 वर्षों से उपेक्षित पड़ी इस हवाई पट्टी को वाराणसी में वायुसेना दिवस के उपलक्ष्य में वाराणसी में 22, 23 और 25 अक्टूबर को होने जा रहे एयर शो के लिए अस्थायी वायुसेना स्टेशन के रूप में तैयार किया गया है। चिनूक और एमआइ-17 हेलीकाप्टर यहां से पहली बार उड़ान भरकर वाराणसी के गंगा घाटों पर होने वाले एयर शो में शामिल होंगे।
लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण गाजीपुर-मऊ मार्ग पर स्थित अंधऊ हवाई पट्टी की चारदीवारी जगह-जगह टूट गई थी और परिसर में घास व गंदगी का अंबार था। एयर शो की तैयारियों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से हवाई पट्टी को दुरुस्त करने के लिए बजट जारी किया गया। इसके बाद चारदीवारी की मरम्मत, परिसर की सफाई और रोशनी की व्यवस्था की गई। हेलीकाप्टरों की सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
1941-42 के आसपास जापान से युद्ध के खतरे के बीच ब्रिटिश शासन ने रणनीतिक और सैन्य कारणों से गाजीपुर के अंधऊ और शहबाजकुली में हवाई पट्टियां विकसित कीं।
इतिहासकार उबैदुर्रहमान सिद्दीकी के अनुसार, अंधऊ हवाई पट्टी को बंगाल और पूर्वोत्तर क्षेत्र पर जापान के हमले से सुरक्षा, जरूरत पड़ने पर विमानों व हेलीकाप्टरों की आपात लैंडिंग और पूर्वोत्तर व बर्मा में तैनात सैनिकों तक राशन व सैन्य सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। हालांकि यहां से विमानों के नियमित संचालन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों ने शहबाजकुली की हवाई पट्टी को नुकसान भी पहुंचाया था।
छोटे विमान और हेलीकाप्टरों के लिए उपयोगी
करीब 1463 मीटर लंबे रनवे वाली अंधऊ हवाई पट्टी का इस्तेमाल वर्तमान में छोटे विमानों और हेलीकाप्टरों के लिए किया जा सकता है। एयर शो के लिए यहां एमआइ-17 और चिनूक हेलीकाप्टर पहुंच चुके हैं। वायुसेना के अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं। अपर पुलिस अधीक्षक नगर डा. राकेश कुमार मिश्रा ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।
एयर शो से जगी नई उम्मीद
देश में उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों में विमानन सुविधाओं के विस्तार के बीच अंधऊ हवाई पट्टी को लेकर उम्मीदें जगी हैं। एयर शो के लिए इस हवाई पट्टी के कायाकल्प के बीच उम्मीदे जगी हैं कि पर्याप्त सुविधाएं विकसित कर इसे भविष्य में पूर्ण क्षेत्रीय एयरपोर्ट के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है।
