पश्चिमी यूपी के 85 कस्बों का गंदा पानी अब नहीं जाएगा नदियों में, 2500 करोड़ की लागत से बनेंगे STP
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत 85 निकायों में ...और पढ़ें

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HighLights
पश्चिमी यूपी की नदियां प्रदूषण मुक्त होंगी, एसटीपी लगेंगे।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत 85 एसटीपी बनेंगे।
कस्बों का अनुपचारित पानी अब नदियों में नहीं जाएगा।
हसीन शाह, गाजियाबाद। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की नदी गंगा, यमुना, हरनंदी और रामगंगा को प्रदूषण से बचाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत पहली बार बड़े महानगरों की तर्ज पर छोटे कस्बों मे भी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने का खाका खींचा गया है।
अब तक कस्बों के नालों का जहरीला पानी सीधे नदियों में गिरकर उन्हें प्रदूषित करता था लेकिन अब शोधित किए एक बूंद पानी भी नदियों में नहीं बहाया जाएगा। 12 जिलों की 85 निकायों में से आठ निकायों में जल निगम में काम शुरू कर दिया है।
इन आठ निकायों में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जबकि कुल 85 निकायों में एसटीपी बनाने पर 2,200 से 2,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
अभी तक केवल महानगरों में ही एसटीपी बनाकर नालों के पानी को ट्रीट करने के बाद नदिया में डाला जा रहा था। जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत में नालों का पानी नदियों में सीधा डाला जा रहा था। ऐसे महानगरों में एसटीपी बनाकर नदियों के पानी को साफ करने की कोशिश असफल हो रही थी।
अब छोटे कस्बों में भी एसटीपी बनाए जा रहे हैं। अब छोटे निकायों से लेकर महानगरों तक का पानी बिना ट्रीट किए नदियों में नहीं डाला जाएगा। गाजियाबाद जल निगम उत्तर प्रदेश के 14 जिलों को कवर करता है।
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जल निगम ने इसका सर्वे किया तो पता चला कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 85 कस्बों का पानी बिना ट्रीट किए नदियों में डाला जा रहा है। इन कस्बों में जल निगम ने एसटीपी बनाने की कवायद शुरू की है। नालों को टेप करने के बाद उनका पानी एसटीपी में जाएगा। एसटीपी में पानी ट्रीट होने के बाद नदियों में डाला जाएगा।
आठ स्थानों पर काम शुरू
पश्चिम यूपी के 12 जिलों गाजियाबाद, मुरादाबाद, बिजनौर, रामपुर, संभल, अमरोहा, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर की 85 से अधिक नगर पालिका परिषदों व नगर पंचायतों को शामिल किया गया है।
इनमें से आठ प्रमुख निकायों में एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है। जल निगम को अधिशासी अभियंता अरुण प्रताप ने बताया कि योजना के तहत गाजियाबाद के खोड़ा में 20 प्रतिशत काम हो चुका है।
इन आठ निकायों में शुरू हुआ काम
| निकाय | जिला | खर्च होने वाली रकम |
|---|---|---|
| खोड़ा-मकनपुर | गाजियाबाद | 93.35 करोड़ |
| सिकंदराबाद | बुलंदशहर | 24.67 करोड़ |
| चांदपुर | बिजनौर | 21.66 करोड़ |
| शेरकोट | बिजनौर | 15.81 करोड़ |
| किरतपुर | बिजनौर | 15.09 करोड़ |
| जहांगीराबाद | बुलंदशहर | 15.02 करोड़ |
| धामपुर | बिजनौर | 14.49 करोड़ |
| पिलखुवा | हापुड़ | 12.24 करोड़ |
इन 46 निकायों में चल रही जमीन चयन की प्रक्रिया
मेरठ के सरधना, परीक्षितगढ़, सिवालखास, दौराला, बहसूमा, फलावदा, खिवई, लावड़, शाहजहांपुर, किठौर, हर्रा, करनावल, खरखौदा, गौतमबुद्ध नगर के बिलासपुर, दनकौर, जहांगीरपुर, रबुपुरा, जेवर, अमरोहा के धनौरा, गजरौला, हसनपुर, बछरायूं, सैदनगली, जोया, नौगावां सादात, उझारी, सहारनपुर जिला के बेहट, गंगोह, नकुड़, नानौता, रामपुर मनिहारन, तीतरों, बिजनौर के हल्दौर, अफजलगढ़, नूरपुर, मंडावर, बढ़ापुर, जलालाबाद, साहनपुर, सहसपुर, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा, अगवानपुर, उमरीकलां, ढकिया, पकवाड़ा, संभल के नरपतनगर दूदावाला, बहजोई (नगर पालिका), नरौली, गुन्नौर, गवां, हापुड़ के बाबूगढ़ में एसटीपी स्थापित करने के लिए जमीन चिह्नित और फाइनल करने का काम चल रहा है।
यहां टेंडर प्रक्रिया जारी
मुरादाबाद की बिलारी, बिजनौर के नजीबाबाद, रामपुर के टांडा, मिलक, बिलासपुर, मुजफ्फरनगर के खतौली, गाजियाबाद की फरीदनगर व पबला में टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इनका तकनीकी सर्वेक्षण का काम पूरा कर लिया गया है।
एस्टीमेट हो रहा तैयार
मुजफ्फरनगर बुढ़ाना, शाहपुर, पुरकाजी, चरथावल, सिसौली, जानसठ, मीरांपुर, भोकरहेड़ी, कैराना, कांधला, एलम, ऊन, थानाभवन, जलालाबाद, झिंझाना, गढ़ीपुख्ता, बनत, मुरादाबाद के कांठ, भोजपुर धर्मपुर, कुंदरकी, बिजनौर के नगीना, स्योहारा, नहटौर, सहारनपुर के अंबेहटा, छुटमलपुर, सरसावा, सुल्तानपुर, बुलंदशहर की शिकारपुर और संभल के दढ़ियाल में एस्टीमेंट तैयार किया जा रहा है। यहां जमीन चिह्नित कर ली गई है।
इन निकायों की भेजी गई डीपीआर व हुआ सर्वे
मुरादनगर, दादरी, डिबाई, स्याना, खेकड़ा, स्वार, शाहबाद, मसवासी, केमरी, सिरसी की डीपीआर मुख्यालय को भेज दी गई है। वहीं मेरठ के मवाना व हस्तिनापुर, संभल की सैफनी का सर्वे हो चुका है।
