जलभराव का पक्का इलाज, 6.86 करोड़ की लागत से 11 जगहों पर होगा काम; मिलेगी बड़ी राहत
गाजियाबाद नगर निगम मानसून में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 6.86 करोड़ रुपये खर्च करेगा। शहर के 11 ...और पढ़ें

पाइपलाइन बिछाने के साथ बनेंगे चैंबर (AI-Generated image)
HighLights
नगर निगम 6.86 करोड़ रुपये जलभराव पर खर्च करेगा
शहर के 11 प्रमुख स्थानों पर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी
जलभराव से निपटने के लिए चैंबर भी बनाए जाएंगे
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। शहर में मानसून के दौरान सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में भरने वाले पानी से निजात दिलाने के लिए नगर निगम 6.86 करोड़ रुपये खर्च करेगा। शहर के 11 प्रमुख स्थानों पर पाइपलाइन बिछाई जाएंगी और चैंबर बनाए जाएंगे। निगम ने इन कार्यों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
नगर निगम क्षेत्र में जलभराव की समस्या केवल 11 स्थानों तक सीमित नहीं है। इस वर्ष मानसून के दौरान नगर निगम ने शहर में ऐसे 55 स्थान चिह्नित किए हैं, जहां वर्षा के दौरान पानी भरा।
इनमें कई मुख्य सड़कें, अंडरपास और घनी आबादी वाले क्षेत्र शामिल हैं। इन स्थानों पर पानी भरने की प्रमुख वजह निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना, नालों तक पानी नहीं पहुंच पाना या उपलब्ध निकासी व्यवस्था का प्रभावी नहीं होना है।
11 जगहों पर मिलेगी जलभराव से राहत
स्थायी जलभराव वाले स्थानों पर प्रस्तावित योजना के तहत पाइपलाइन बिछाकर पानी को एकत्र करने और वहां से आगे निकालने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। चैंबर पानी को एक जगह एकत्र करने और पाइपलाइन के जरिये उसकी निकासी में मदद करेंगे।
इससे उन स्थानों पर पानी निकालने की प्रक्रिया आसान होगी, जहां अभी नगर निगम को मशीनों और पंप सेट की मदद लेनी पड़ती है। नगर निगम अभी केवल उन 11 स्थानों को चिह्नित किया जहां अधिक मात्रा में पानी भरता है।
55 स्थानों पर जलभराव से निपटने की चुनौती
नगर निगम के चिह्नित 55 जलभराव वाले स्थानों में लाल कुआं, यूपी गेट, साहिबाबाद, राजेंद्र नगर, प्रताप विहार, पटेल नगर, मकनपुर, भोपुरा चौक, साईं उपवन अंडरपास, विजय नगर अंडरपास और अर्थला अंडरपास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा नवयुग मार्केट, पुराना बस अड्डा, नया बस अड्डा, मेरठ रोड और तहसील परिसर के आसपास भी जलभराव की समस्या सामने आती रही है।
नगर निगम को हर वर्ष जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अस्थायी इंतजाम करने पड़ते हैं। इस वर्ष जल निकासी के लिए 68 डीवाटरिंग पंप सेट लगाए गए थे। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों के साथ मशीनों और अन्य संसाधनों की जरूरत पड़ती है।
