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सोलर पैनल वालों की बल्ले-बल्ले, अब सीधे पड़ोसी को बेच सकेंगे एक्स्ट्रा बिजली; UP में लागू होगा नया सिस्टम

Published: Sun, 20 Sep 2026 02:49 PM (IST)

गाजियाबाद में जल्द ही पी2पी (पियर-टू-पियर) एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था लागू होगी, जिससे सोलर उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे पड़ोसियों को बेच सकेंगे।

अब यूपी में पड़ोसी को बेच सकेंगे बिजली। फोटो: एआई जनरेटेड

अब यूपी में पड़ोसी को बेच सकेंगे बिजली। फोटो: एआई जनरेटेड

HighLights

  1. सोलर उपभोक्ता अतिरिक्त बिजली सीधे पड़ोसियों को बेच सकेंगे

  2. लेनदेन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, बिजली मौजूदा ग्रिड से प्रवाहित होगी

  3. उत्तर प्रदेश में पहली बार लागू होगी यह नई पी2पी व्यवस्था

लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। अभी तक घर या प्रतिष्ठान की छत पर लगे सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होने पर उपभोक्ताओं के पास उसे ग्रिड में देने और बिल में समायोजन कराने का विकल्प है।

जल्द ही इसमें एक और विकल्प जुड़ने जा रहा है। पीटूपी (पियर-टू-पियर) एनर्जी ट्रेडिंग व्यवस्था में सोलर उपभोक्ता अपनी अतिरिक्त बिजली सीधे पड़ोसी उपभोक्ता को बेच सकेंगे। उत्तर प्रदेश में पहली बार लागू होने वाली इस व्यवस्था की तैयारी चल रही है।

इस व्यवस्था में बिजली के लिए अलग लाइन बिछाने की जरूरत नहीं होगी। विक्रेता और खरीदार के बीच लेनदेन डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर होगा, जबकि बिजली पीवीवीएनएल के मौजूदा ग्रिड नेटवर्क के माध्यम से प्रवाहित होगी।

ग्रिड के इस्तेमाल के बदले निगम शुल्क लेगा। हालांकि अतिरिक्त बिजली की बिक्री किस दर पर होगी और ग्रिड शुल्क कितना होगा, यह अभी तय नहीं किया गया है।

जिले में वर्तमान में 9072 उपभोक्ता नेट मीटरिंग से जुड़े हैं, जबकि करीब 950 उपभोक्ता नेट बिलिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे हैं। दोनों को मिलाकर सोलर से जुड़ी इन व्यवस्थाओं में करीब 10,022 उपभोक्ता हैं।

पीटूपी व्यवस्था में अंतर यह होगा कि अतिरिक्त बिजली का लाभ केवल बिल समायोजन तक सीमित नहीं रहेगा। डिजिटल प्लेटफाॅर्म के माध्यम से इसे दूसरे उपभोक्ता की जरूरत से जोड़ा जा सकेगा।

बिल में ही होता है यूनिट का समायोजन

अगर किसी घर में एक माह में सोलर पैनल से 300 यूनिट बिजली बनी और खपत 220 यूनिट रही तो बची 80 यूनिट बिजली ग्रिड में चली जाएगी। नियमानुसार इन अतिरिक्त यूनिट का समायोजन ग्रिड से ली गई बिजली के साथ किया जाता है।

इस व्यवस्था में उपभोक्ता को अतिरिक्त बिजली का सीधे किसी दूसरे व्यक्ति से सौदा करने की जरूरत नहीं पड़ती।

नेट बिलिंग में मिलती है तय दर

नेट बिलिंग का इस्तेमाल मुख्य रूप से व्यावसायिक उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है। मान लीजिए किसी प्रतिष्ठान ने दिन में 500 यूनिट बिजली सोलर से बनाई और उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ।

अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली गई। वर्तमान व्यवस्था में इसके लिए निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है। 2.90 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से उपभोक्ता को भुगतान किया जाता है।

 

  • जिले में कुल उपभोक्ता- 11,87,567
  • नेट मीटरिंग उपभोक्ता- 9,072
  • नेट बिलिंग उपभोक्ता- 950
  • दोनों व्यवस्थाओं से जुड़े कुल उपभोक्ता- 10,022
उत्तर प्रदेश में पहली बार पीटूपी व्यवस्था लागू होने वाली है। इस योजना पर कार्य चल रहा है। फिलहाल जरूरत से अधिक उत्पन्न बिजली के लिए उपभोक्ता नेट मीटरिंग और नेट बिलिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।
- अनिल कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, जोन-प्रथम

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