स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल, तीन मंडलों के अनेक केंद्रों पर नहीं मिली ईडीएल की 50 जरूरी दवाएं
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा गठित टीमों के निरीक्षण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन मंडलों की ...और पढ़ें
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निरीक्षण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन मंडलों की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई।

समय कम है?
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मदन पांचाल, गाजियाबाद। अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं अमित कुमार द्वारा पहली बार एसआरएम के तहत गठित की गई अफसरों की 70 से अधिक टीमों के निरीक्षण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन मंडलों की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। फरवरी के शुरू में स्वास्थ्य केंद्रों के किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट शुक्रवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य सेवाएं के समक्ष रखी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक मेरठ मंडल के छह जिलों में कुल 1023 अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। 1023 केंद्रों के सापेक्ष 23 प्रतिशत केंद्रों पर आवश्यक ड्रग लिस्ट (ईडीएल) में दर्ज 215 में से 50 से अधिक जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। इनमें खांसी,बुखार, निमोनिया,पेट दर्द, उल्टी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिये उपयोग होने वाली कई दवाएं भी शामिल हैं।
मुरादाबाद में 842 के सापेक्ष 20 और सहारनपुर मंडल में 534 केंदों के निरीक्षण के सापेक्ष 19 प्रतिशत अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर ईडीएल में दर्ज 50 जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। सबसे अधिक गौतमबुद्ध नगर में निरीक्षण किये गये 69 स्वास्थ्य केंद्रों में से 46 प्रतिशत केंद्रों पर ईडीएल की 50 से अधिक जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। बागपत में 38, बिजनौर में 30 , मेरठ में 24, बुलंदशहर में 23 और गाजियाबाद में आठ प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्रों पर 50 से अधिक दवाएं नहीं मिली।
हापुड़ में दो प्रतिशत केंद्रों पर जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को उक्त तीनों मंडलों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मंडलीय अपर निदेशक और सभी जिलों के सीएमओ को इस संबंध में कड़ी फटकार लगाई है। यह तक कहा कि कोई काम नहीं कर रहा है।
वेयर हाउसों को दवा आपूर्ति करने वाले अधिकारियों से भी जवाब तलब किया गया। निरीक्षण रिपोर्ट का पता चलते ही तीनों मंडलों के जिलों के चिकित्सकों एवं स्टोर प्रभारियों की नींद उड़ गई है। अब ईडीएल एवं स्टोर में उपलब्ध दवाओं का मिलान शुरू कर दिया गया है।
दवा न मिलने पर बाहर से खरीदनी पड़ती हैं दवाएं
मरीजों का कहना है कि अस्पताल,सीएचसी और पीएचसी पर जरूरी दवाएं न मिलने पर बाहर से मंहगी दरों पर दवाएं खरीदनी पड़ती है। दिल्ली गेट की रहने वाली मुन्नी ने बताया कि कई बार बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ी हैं। कुशलिया के रहने वाले बालेश्वर का कहना है कि जरूरी दवाएं केंद्रों पर कम ही मिलती हैं। ऐसे में बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती है। जिला एमएमजी अस्पताल के सीएमएस की टेबल पर कई बार मरीजों ने बाहर से खरीदी गईं मंहगी दवाएं रखकर दुखड़ा सुनाया है।
| अस्पताल का प्रकार | औषधियों की संख्या |
|---|---|
| जिला अस्पताल | 393 |
| मानसिक चिकित्सालय | 203 |
| सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र | 241 |
| प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र | 195 |
| आयुष्मान आरोग्य मंदिर | 84 |
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