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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : समाजवादी आवास योजना का नाम बदलकर जल्द फ्लैट बेचने की अनुमति मिल सकती है। जीडीए की गुजारिश पर शासन ने विचार करना शुरू कर दिया है। शासन ने जीडीए से पूछा है कि क्या नाम बदलने से पहले फ्लैट की कीमतों का पुनर्निर्धारण किया है? जीडीए ने अपने जवाब में कहा कि योजना का नया नाम और कीमत निर्धारित करने का अधिकार शासन के पास सुरक्षित है। वहीं से निर्धारण कर जीडीए को अवगत करा दिया जाए।

समाजवादी पार्टी के शासनकाल में प्रदेश में समाजवादी आवास योजना लांच की गई थी। इसमें कई तरह के शुल्कों में रियायत कर कम कीमत में एक और दो बीएचके के फ्लैट बनाने के लिए प्राधिकरणों को आदेश दिए गए थे। जीडीए ने इस योजना के तहत कोयल एंक्लेव, इंद्रप्रस्थ योजना और मधुबन-बापूधाम ग्रुप हाउसिग प्रोजेक्ट लॉन्च किया था। मधुबन-बापूधाम में आधे फ्लैट आवंटित कर दिए गए थे, बाकी निर्माण कार्य के चलते आवंटित नहीं हो पाए थे। अन्य दो स्थानों पर भी यही हाल रहा। अब तीनों जगह ग्रुप हाउसिग पूरी तरह बनकर तैयार है। करीब 1200 फ्लैट ऐसे हैं, जो किसी को आवंटित नहीं हैं। इस आवासीय योजना के नाम में समाजवादी शब्द जुड़ा होने के कारण अब जीडीए इन फ्लैटों को नहीं बेच पा रहा है। रियल एस्टेट सेक्टर में सुस्ती के दौर में कम प्रोजेक्ट लॉन्च हो रहे हैं। जीडीए की मानचित्र शुल्क, विकास शुल्क, पर्यवेक्षण शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क, प्लॉट के हिस्से होने पर मिलने वाले शुल्क समेत कई अन्य शुल्कों से होने वाली आय कम हो रही है। आय अर्जित करने के लिए जीडीए तीनों स्थानों पर बने फ्लैटों की स्कीम आवासीय योजना के नाम के कारण लांच नहीं कर पा रहा है। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है। ऐसे में जीडीए ने इस आवासीय योजना का नाम परिवर्तन कर फ्लैट बेचने की इजाजत शासन से मांगी थी। जीडीए अधिकारियों ने बताया कि योजना का नाम परिवर्तन होने पर शुल्क में रियायतें खत्म कर दी जाएंगी। पुनर्निर्धारण होने पर फ्लैट की कीमत दो से ढाई लाख रुपये तक बढ़ेगी।

------- शासन ने समाजवादी आवास योजना का नाम परिवर्तन करने की अर्जी पर नई कीमतों के निर्धारण के बारे में पूछा है। शासन को जवाब भेज दिया गया है। उसमें शासन को नई कीमतें निर्धारित करने का अधिकार दे दिया गया है।

- संतोष कुमार राय, सचिव, जीडीए

Posted By: Jagran

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