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गाजियाबाद में रानी लक्ष्मीबाई योजना के 75% आवेदन खारिज, 10 साल में सिर्फ 234 पीड़ितों को मिला लाभ

Published: Fri, 27 Feb 2026 10:30 AM (IST)

प्रदेश सरकार की रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना के तहत पिछले 10 वर्षों में 75% आवेदन निरस्त ...और पढ़ें

रानी लक्ष्मीबाई योजना का नहीं मिल रहा लाभ। (सौ- इंटरनेट मीडिया)

रानी लक्ष्मीबाई योजना का नहीं मिल रहा लाभ। (सौ- इंटरनेट मीडिया)

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संक्षेप में पढ़ें

आदित्य त्रिपाठी, गाजियाबाद। प्रदेश सरकार ने विभिन्न हिंसाओं की पीड़ित महिलाओं व बच्चों के लिए रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना शुरू की थी ।इस योजना में आए ज्यादातर आवेदन जिला स्तरीय समिति की जांच में गलत पाए गए।

बीते 10 वर्ष की बात करें तो कुल आवेदन में से 75 प्रतिशत आवेदनों को समिति ने निरस्त किया है। जबकि यह आवेदन पीड़ित की बजाय पुलिस करती है। इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग भी देता है।

2015 में की था शुरूआत

हिंसाओं से पीड़ित महिलाओं व बच्चों को आर्थिक मदद देने के लिए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2015 में रानी लक्ष्मीबाई महिला एवं बाल सम्मान कोष योजना की शुरूआत की थी। योजना की विभिन्न श्रेणियों में अभी तक 1690 आवेदन आए हैं।

इनमें से अभी तक महज 234 पीड़ितों व उनके स्वजन के बैंक खाते में ही योजना का लाभ पहुंचा है।

इसके अलावा जिला स्तरीय समिति ने 1266 आवेदन निरस्त कर दिये। समिति की जांच में ये विभिन्न कारणों से पात्र नहीं पाए गये। बाकी आवेदन जिला स्तरीय समिति, स्वास्थ्य विभाग व पुलिस विभाग के नोडल अधिकारियों के पास लंबित हैं।

36 पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट नहीं की अपलोड

स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक 36 पीड़िताओं की मेडिकल रिपोर्ट शासन की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है। जिला स्तरीय समिति के पास 12 आवेदन लंबित हैं। शासन की इस योजना का मकसद दुष्कर्म, एसिड अटैक, घरेलू हिंसा, दहेज हत्या, पाक्सो आदि हिंसा पीड़ितों को मदद देना है।

महिला सम्मान कोष के माध्यम से हिंसा से पीड़ित महिलाओं के इलाज व पुनर्वास के लिए तीन से 10 लाख रुपये तक की मदद दी जाती है।

ये होती है प्रक्रिया

महिला या बच्चे के साथ आपराधिक घटना होने पर पुलिस अपनी कार्रवाई पूरी कर चार्जशीट योजना की आफिशियल वेबसाइट पर अपलोड करती है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग में बनाए गए नोडल अधिकारियों को जांच के आधार पर पीड़िताओं के मेडिकल रिपोर्ट अपलोड करनी होती है।

इसके बाद सभी मामले जिला संचालन समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं। समिति से सत्यापन के बाद रिपोर्ट शासन को भेज दी जाती है। इसके बाद पीएफएमएस के माध्यम से योजना की सहायता राशि पीड़िता के बैंक खाते में भेजी जाती है।

श्रेणीवार मामलों का विवरण

श्रेणी (धारा) कुल मामले लाभ
दहेज हत्या (304बी) 72 41
एसिड अटैक (326-ए) 28 09
दुष्कर्म के साथ शारीरिक क्षति (376-ए) 09 03
सामूहिक दुष्कर्म (376-डी) 126 15
धारा 4 पाक्सो 909 113
धारा 6 पाक्सो 574 55

योजना में आए आवेदनों की स्थिति

  • पुलिस ने फाइल किए मामले: 1690
  • स्वास्थ्य विभाग द्वारा फॉरवर्ड मामले: 1582
  • स्वास्थ्य विभाग में लंबित मामले: 36
  • नोडल पुलिस अधिकारी के यहां लंबित: 06
  • जिला स्तरीय समिति के यहां लंबित: 12
  • जिला स्तरीय समिति द्वारा निरस्त मामले: 1266

आर्थिक मदद का विवरण

  • दुष्कर्म के साथ मृत्यु या स्थाई निष्क्रियता ₹10 लाख
  • सामूहिक दुष्कर्म (धारा 376-डी) ₹7 लाख
  • एसिड से 10 से 30% जलने पर ₹3 लाख
  • एसिड से 30% से अधिक जलने पर ₹5 लाख
  • तेजाब हमले के बाद मृत्यु होने पर ₹10 लाख
  • दो प्रतिशत चेहरा जलने पर ₹3 लाख
  • दहेज हत्या होने पर परिजनों को ₹3 लाख

जो भी मामले आते हैं उनका जिला स्तरीय समिति के सत्यापन के बाद शासन को भेजा जाता है। जो आवेदन अपात्र पाए जाते हैं उन्हें निरस्त कर दिया जाता है।

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अभिनव गोपाल, मुख्य विकास अधिकारी