राजनगर एक्सटेंशन में टूटी सड़क बनी आफत, दिन-रात उड़ रही धूल; सांस लेना मुश्किल
गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिससे धूल उड़ने और गड्ढों के कारण स्थानीय निवासियों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।

राजनगर एक्सटेंशन में गड्ढे और धूल से बदहाल सड़क
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन के वार्ड- 50 में अग्रवाल हाइट्स के पास से अल्फा क्रिकेट स्टेडियम की तरफ जाने वाली सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त अवस्था में है, जिस कारण वहां पर दिन व रात को धूल उड़ती रहती है।
वाहनों के गुजरने से धूल का गुबार उठता है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों को परेशानी होती है। धूल के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने के साथ ही आंखों में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
वहीं, सड़क की खराब हालत के चलते दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
बारिश में समस्या दोगुनी
स्थानीय लोगों के लिए यह मार्ग रोजाना आवागमन का महत्वपूर्ण रास्ता है, लेकिन इसकी बदहाली जगह-जगह गड्ढे और टूटी हुई सतह के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है। वर्षा के दिनों में यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। सड़क की स्थिति को देखते हुए निवासियों द्वारा संबंधित विभाग से इसके जल्द निर्माण और मरम्मत की मांग उठाई जा रही है।
'राजनगर एक्सटेंशन में सरकार की तरफ से बड़ी-बड़ी योजनाएं दिखाई जाती हैं। बिल्डरों द्वारा जब फ्लैट बेचे जाते हैं तो अच्छी-अच्छी सड़के दिखाते हैं परंतु जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है, जबकि टूटी सड़के, उड़ती धूल ही क्षेत्र की पहचान बन चुके है।'
-अनुज त्यागी, निवासी
'मुझे प्रतिदिन मंदिर जाना होता है और सिर्फ अग्रवाल हाइट्स की तरफ से ही निकालना मजबूरी है क्योंकि वह रास्ता अधिक पास पड़ता है और बाहर रोड पर अक्सर जाम लगा रहता है इसलिए जब यहां से निकलते हैं तो रोज किसी भी समय धूल उड़ती रहती है सड़के टूटी पड़ी रहती हैं।'
-विजय तोमर
'सड़कें किसी भी क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, लेकिन जब इन्हीं सड़कों की हालत खराब हो जाए तो लोगों का सामान्य जीवन भी प्रभावित होने लगता है। सोसाइटी में रहने वाले लोगों, नौकरीपेशा व्यक्तियों, बुजुर्गों और बच्चों को प्रतिदिन इस समस्या से जूझना पड़ता है।'
-नीरज श्रीवास्तव, निवासी
'एक आम नागरिक के लिए सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि उसकी दैनिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब सड़कें ही जर्जर हों, तो समय पर अपने कार्यस्थल तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी पड़ती है।'
-अंकित जैन, निवासी
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