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गुरुग्राम में धूल प्रदूषण का कहर, पीएम10 स्तर मानक से ढाई गुना अधिक

Published: Mon, 26 Oct 2026 03:19 PM (IST)

गुरुग्राम में पीएम10 का स्तर राष्ट्रीय वार्षिक मानक से 2.75 गुना अधिक है, जिससे धूल प्रदूषण एक गंभीर चिंता का ...और पढ़ें

गुरुग्राम में धूल प्रदूषण का कहर ( फोटो स्रोत : जागरण )

गुरुग्राम में धूल प्रदूषण का कहर ( फोटो स्रोत : जागरण )

HighLights

  1. गुरुग्राम में पीएम10 स्तर मानक से 2.75 गुना अधिक।

  2. टूटी सड़कें, निर्माण कार्य धूल प्रदूषण के मुख्य कारण।

  3. फेफड़ों को प्रभावित कर रहा धूल, स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा।

जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। साइबर सिटी में सिर्फ वाहनों के धुएं से ही प्रदूषण नहीं फैल रहा है, टूटी सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ती धूल लाेगों के फेफड़ों में पहुंच रही है।

सेंटर फार रिसर्च आन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की ओर से साझा किए गए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम में 2019 से पीएम10 का स्तर लगातार राष्ट्रीय वार्षिक मानक से ऊपर बना हुआ है।

ये हैं प्रदूषण फैलने के कारण

23 अक्टूबर 2026 तक यह स्तर 164.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया, जबकि निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। यानी प्रदूषण का स्तर मानक से करीब 2.75 गुना अधिक है।

तेजी से बढ़ते निर्माण कार्य, टूटी सड़कें, सड़क किनारे जमा मिट्टी, अधूरे फुटपाथ, खुले में निर्माण सामग्री का परिवहन और वाहनों की आवाजाही धूल प्रदूषण के मुुख्य कारण हैं। वाहनों के गुजरने से सड़क पर जमा धूल दोबारा हवा में उड़ने लगती है। निर्माण स्थलों से निकलने वाले कण और औद्योगिक गतिविधियां भी प्रदूषण बढ़ाती हैं।

2019 में 190.2, 2022 में 196.7 रहा स्तर

गुरुग्राम में पीएम10 का स्तर 2019 में 190.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था, जो 2020 में घटकर 148.4 रह गया। वर्ष 2022 में यह फिर बढ़कर 196.7 और 2025 में 159.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया।

पीएम10 ऐसे कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। ये सांस के साथ श्वसन तंत्र में प्रवेश कर सकते हैं और कुछ कण फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं।

इनके अधिक संपर्क से आंखों और गले में जलन, खांसी तथा सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

हरियाणा के दूसरे शहरों में भी स्थिति चिंताजनक

23 अक्टूबर 2026 तक पीएम10 का स्तर बल्लभगढ़ में 195.1, फरीदाबाद में 144.1, धारूहेड़ा में 123.9, मानेसर में 121.2, भिवानी में 91.9 और पलवल में 79.8 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा। वर्ष 2025 में धारूहेड़ा में यह स्तर 277.8 और मानेसर में 196.7 दर्ज किया गया था।


धूल प्रदूषण को रोकने लिए करने होंगे यह उपाय

  • निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम जरूरी हैं।
  • निर्माण सामग्री ढककर ले जाने, खुले में मलबा डालने पर कार्रवाई हो। -
  • औद्योगिक इकाइयों व रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) संयंत्रों के निरीक्षण पर भी जोर देना होगा।


सड़क सर्वे में मिलीं 258 खामियां, यह प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण

26 दिसंबर 2025 के निरीक्षण में 125 सड़कों में से 34 पर बहुत अधिक, 58 पर मध्यम और 29 पर कम धूल मिली थी, जबकि चार सड़कें धूल मुक्त थीं। इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को 52 सड़कों के 104 किलोमीटर हिस्से के निरीक्षण में 258 खामियां मिलीं हैं।


धूल प्रदूषण को रोकने के लिए नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागाें को सड़क मरम्मत और नियमित पानी छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं।-प्रवीण कुमार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गुरग्राम

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