जागरण संवाददाता, गाजियाबाद : प्रदेश सरकार ने सूक्ष्म, छोटे एवं मझोले उद्योगों की स्थापना में 72 घंटे में उद्योग शुरू करने की योजना जिले में परवान चढ़ने लगी है। उद्योगों को शुरू करने की दिशा में उठाए गए बड़े कदम का लाभ लेने के लिए अभी तक 141 उद्यमियों ने आवेदन किया है।

नया काम शुरू करने के लिए हर उद्यमी को लगभग 29 विभागों से करीब 80 तरह की एनओसी लेनी होती है। इसमें लगने वाले समय को देखते हुए प्रदेश सरकार ने पिछले साल सितंबर में एमएसएमई एक्ट लागू किया। एमएसएमई-एक्ट के तहत नए उद्योगों के लिए शासन की ओर से उद्यमियों को 72 घंटे में प्रदूषण, फायर, भूमि, लेबर एवं फैक्ट्री एक्ट का एक ही प्रमाण पत्र मुहैया कराया जा रहा है। एक्ट के तहत उद्यमी को डीएम की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय नोडल समिति के समक्ष भूमि, विद्युत सुरक्षा, पर्यावरण, श्रम व अग्निशमन संबंधी अनापत्ति घोषणा पत्र देना होगा। घोषणा पत्र पाने के 72 घंटे के भीतर संयुक्त आयुक्त उद्योग स्वीकृति प्रमाण पत्र जारी करते हैं। प्रमाण पत्र को निवेश मित्र पोर्टल पर अपलोड किया जाता है। उद्यमी केवल एक अनापत्ति पत्र प्राप्त कर एक हजार दिन तक उद्यम संचालित कर सकता है। बाकी के लिए एनओसी लेने के लिए उन्हें 900 दिन का समय मिलेगा। इस अवधि में उद्यमी के यहां किसी भी विभाग का कोई अधिकारी निरीक्षण के लिए नहीं आएगा।

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उद्यम लगाने के लिए 25 से 35 फीसद अनुदान प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना (पीएमईजीपी) में स्वरोजगार के लिए दो तरह के ऋण मिल सकते हैं। सेवा क्षेत्र से जुड़े कारोबार के लिए योजना के तहत 15 लाख व औद्योगिक इकाई के लिए लिए 25 लाख रुपये तक का ऋण मिलता है। इसमें 35 प्रतिशत तक का अनुदान है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत उद्योग के लिए 25 लाख व सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये का ऋण मिलता है, जिसमें 25 प्रतिशत तक का अनुदान है। इनके लिए बैंकों ने अलग-अलग ब्याज निर्धारित किया है।

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापना एवं संचालन सरलीकरण अधिनियम गत वर्ष लागू हुआ था, लेकिन जनपद में इस वर्ष ही क्रियाशील हुआ है। इसके तहत एमएसएमई नए उद्यम, पहले से संचालित उद्योग के विस्तारीकरण एवं विविधिकरण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) 72 घंटे में उपलब्ध कराई जा रही है। सभी औद्योगिक संगठनों को योजना की जानकारी दी गई है। औद्योगिक इकाई लगाने के इच्छुक नए उद्यमियों के लिए हेल्प डेस्क भी बनाई गई है।

-बीरेंद्र कुमार, संयुक्त आयुक्त उद्योग

Edited By: Jagran