Exclusive: एनएच-9 पर जाम से जनता की जेब पर डाका, हर महीने 108.50 करोड़ रुपये का ईंधन हो रहा बर्बाद
एनएच-9 पर लगने वाला भीषण जाम हर महीने 108.50 करोड़ रुपये का ईंधन बर्बाद कर रहा है, जिससे जनता की ...और पढ़ें

सेक्टर- 62 के पास नोएड़ा की तरफ लगे जाम में फंसे वाहन। जागरण
HighLights
एनएच-9 जाम से हर महीने 108.50 करोड़ का ईंधन बर्बाद हो रहा।
लाखों वाहन चालक प्रदूषण और समय की बर्बादी से जूझ रहे।
अधिकारी समस्या के प्रति उदासीन, समाधान में विफल रहे हैं।
आशुतोष गुप्ता, साहिबाबाद। एनसीआर की लाइफलाइन माने जाने वाले एनएच-9 पर लगने वाला जाम आबोहवा के फेफड़े खराब कर रहा है जबकि आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण भी काफी बढ़ रहा है। दो जिलों गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद समेत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के जिम्मेदार मिलकर हाइवे पर लगने वाले जाम को समाप्त नहीं कर पा रहे हैं।
108.50 करोड़ रुपये का ईंधन फुंक रहा
एनएच-9 पर नोएडा सेक्टर 62 और इंदिरापुरम के पास कुछ क्षेत्र में लगने वाले जाम से ही प्रतिदिन 3.52 करोड़ रुपये का ईंधन धुआं हो जाता है। एक अनुमान लगाया जाए तो एक माह में एनएच-9 पर जाम में 108.50 करोड़ रुपये का ईंधन फुंकता है, जबकि इतनी लागत से तो बड़ा फ्लाईओवर खड़ा हो सकता है।
जेब पर भी अतिरिक्त भार पड़ रहा
एनएच-9 पर लगने वाले जाम से न केवल प्रतिदिन वाहन चालकों का समय खराब होता है बल्कि उनकी जेब पर भी अतिरिक्त भार पड़ता है। बावजूद इसके जिम्मेदार समस्या के प्रति आंखें मूंदे हैं और आम आदमी को उसकी दशा पर छोड़ दिया है। एनएच-9 पर प्रतिदिन पांच लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। इनमें से अधिकांश वाहन गौतमबुद्धनगर व दिल्ली की तरफ आते-जाते हैं।
एनएच-9 का ट्रैफिक जाम कब होगा खत्म?
इनमें से करीब 80 फीसदी वाहन सुबह व शाम के समय पीक समय में आते-जाते हुए जाम में फंसते हैं। जाम में वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ा रहा है। सर्दी के मौसम में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण रोकने के लिए तीन राज्यों की सरकारें विभिन्न योजना बना रही हैं लेकिन एनएच-9 पर लगने वाले जाम की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। इस उदासीनता का खामियाजा केवल जाम में फंसने वाले व आसपास रहने वाले लोगों को उठाना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| एनएच-9 से प्रतिदिन गुजरने वाले वाहन | पांच लाख |
| सुबह-शाम पीक समय में निकलने वाले वाहन | चार लाख |
| जाम में ईंधन का नुकसान | 3.52 करोड़ रुपये |
| एक माह में खर्च होने वाला ईंधन | 108.50 करोड़ रुपये |
एनएच-9 पर निकलने वाले वाहन
| वाहन का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| कार | 2 लाख |
| दोपहिया | 1.25 लाख |
| बस व ट्रक | 50 हजार |
| टैंपो व आटो | 25 हजार |
फुंकने वाला ईंधन
खोड़ा व इंदिरापुरम की हवा कितने दिन किस श्रेणी में रही
ऐसे लगाया गया अनुमान
एनएच-9 पर सबसे अधिक वाहन सेक्टर 62 और यूपी गेट से वापस आते समय इंदिरापुरम में साया गोल्ड सोसायटी और कनावनी कट के सामने फंसते हैं। इस दौरान 500 मीटर से लेकर एक किलोमीटर तक जाम लग जाता है, जिसे पार करने में आधा घंटे से अधिक समय लग जाता है। इस जाम में फंसकर कार का करीब 90 रुपये, दोपहिया वाहन का करीब 60 रुपये, बस व ट्रक का 160 रुपये व आटो-टैंपो का 70 रुपये तक का ईंधन फुंक जाता है।
जाम से सबसे अधिक होता है प्रदूषण
ट्रैफिक सिग्नल पर अमूमन लोग वाहन का इंजन बंद कर देते हैं लेकिन जाम में फंसने पर वाहन बंद नहीं कर सकते। ऐसे में क्लच, ब्रेक और एक्सीलेटर का प्रयोग अधिक होता है और अधिक ईंधन फुंकने के साथ प्रदूषण अधिक होता है। जाम में फंसकर वाहनों के धुएं से कार्बनडाई ऑक्साइड, सल्फरडाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी घातक गैस अधिक निकलती हैं।
जाम में फंसने के बाद वाहन चालक इंजन बंद नहीं कर सकता। जाम में ब्रेक, एक्सीलेटर, क्लच व गियर का अधिक प्रयोग होता है। ऐसे में ईंधन की खपत अधिक होती है और वाहनों का एवरेज कम आता है।
-वैभव सिंघल, आटो मोबाइल कारोबारी।
एनएच-9 पर कनावनी के पास नोएडा व एनएच-9 से आने वाला ट्रैफिक मर्ज होता है, साथ ही बस अड्डा और एफओबी के कारण जाम लगता है। इसे समाप्त कराने के लिए एनएचएआइ के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है। पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
-त्रिगुण बिसेन, डीसीपी यातायात, गाजियाबाद।
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