गाजियाबाद, जेएनएन। घर में कुत्ता पालना पड़ेगा महंगा। इसके लिए हर साल पांच हजार रुपये पंजीकरण शुल्क अदा करना होगा। शुक्रवार को मेयर आशा शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित नगर निगम की बोर्ड बैठक में घर में कुत्ता पालने के लिए पंजीकरण शुल्क को दस रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दिया गया। शुल्क में 500 गुना की वृद्धि की गई है।

नगर निगम कराएगा सर्वे
तय हुआ कि निगम पालतू कुत्तों का सर्वे कराएगा। शुल्क बढ़ाने के लिए नई नियमावली तैयार की जाएगी। उसके बाद इस दर को लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही तय हुआ कि सड़क पर कुत्ते को शौच कराने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

सड़क पर शौच करवाने वालों पर लगेगा 500 रुपये का जुर्माना
ऐसा करते पकड़े जाने पर कुत्ता पालने वाले व्यक्ति से 500 रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। अधिनियम में पंजीकरण का अधिकार नगर निगम अधिनियम 1959 में कुत्ता पालने पर पंजीकरण शुल्क का प्रावधान किया गया है।

पंजीकरण की जिम्‍मेदारी नगर निगम की
पंजीकरण की जिम्मेदारी नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग को दी गई है। इस प्रावधान के बावजूद वर्ष 1998 तक शुल्क निर्धारण न होने के कारण कुत्तों का पंजीकरण नहीं होता था। प्रदेश सरकार ने 5 जून 1999 को गजट जारी कर पंजीकरण शुल्क दस रुपये निर्धारित किया था। तब से संपूर्ण प्रदेश के नगर निगमों में यह शुल्क लिया जा रहा है। ज्यादातर निगमों ने इस शुल्क में वृद्धि कर दी, लेकिन गाजियाबाद नगर निगम ने इस शुल्क को बढ़ाने की कभी कवायद नहीं की थी। कई नगर निगम बोर्ड बैठकों में शुल्क बढ़ाने के लिए पार्षद आवाज बुलंद करते रहे हैं।

अब दिक्कत ज्यादा होने लगी
नगर निगम सीमा में 80 हजार से ज्यादा पालतू कुत्ते हैं। केनल क्लब से जुड़े सदस्यों और पालतू जानवरों जुड़ी से वस्तुओं का कारोबार करने वालों के अनुसार इतने कुत्ते निगम क्षेत्र में से पल रहे हैं। इनमें कुत्तों की हर तरह की नस्लें हैं। ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में कुत्तों की संख्या कम है। जिन कॉलोनियों में एक यूनिट बनी हुई हैं, उनमें पालतू कुत्तों की संख्या ज्यादा है।

ये होंगी नियमावली में पंजीकरण की शर्तें
पालतू जानवर का वैक्सीनेशन कराएं
उसके वैक्सीनेशन कार्ड को मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से सत्यापित कराएं
सत्यापित कॉपी के साथ निगम में पालतू पशु की दो फोटो लगाकर आवेदन करना होगा
शुल्क जमा कराने के बाद आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होगी
पंजीकरण शुल्क प्रति पशु होगा

बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग को देंगे
शहर में बंदर और कुत्तों के आतंक से लोग परेशान हैं। पार्षदों ने बोर्ड बैठक में इस मुद्दे को उठाया। हर पार्षद ने अपनी पीड़ा जताई। इस पर नगर निगम के पशु चिकित्सा अधिकारी एके सिंह ने उन्हें बताया कि दो बार बंदर पकड़ने के लिए टेंडर किए गए। कोई आने को तैयार नहीं है।

महीनों पहले बंदर पकड़ने गई टीम से मारपीट की घटना के कारण कोई यहां काम नहीं करना चाहता। इस वजह से वन विभाग को प्रस्ताव भेजा जा रहा है कि वह नियमों के दायरे में बंदरों को पकड़ें। उसमें आने वाला खर्च निगम वहन करेगा। इसके अलावा कुत्तों को पकड़ने के लिए पीपुल फॉर एनिमल्स (पीएफए) को नया प्रतिनिधि नियुक्त करने को पत्र भेजा गया है।

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