गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। सेनेटरी कारोबारी मनीष यादव (28) की हत्या में कुर्की से ठीक पहले सपा नेता समेत तीन ने बृहस्पतिवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। पांच ने भी हाल में ही समर्पण किया था। एक अब भी फरार है।

शाहपुर बम्हैटा की कृष्णा विहार कॉलोनी में रहने वाले सेनेटरी कारोबारी मनीष यादव (28) को 22 दिसंबर की शाम सात बजे कार सवार बदमाश ने नगर कोतवाली क्षेत्र में जीटी रोड गोली मार दी थी। यशोदा अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को मनीष ने दम तोड़ दिया था। मामले में बड़े भाई आशीष ने 15 साल पुरानी रंजिश में हत्या की बात कहते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

मुख्य आरोपित यशदेव के अलावा सपा नेता विनोद यादव, कालू, मान सिंह, विजय सिंह, सुनील, महराम व रम्मन और सिकंदाराबाद निवासी महेंद्र की पहचान पुलिस ने की थी, लेकिन गिरफ्तारी एक की भी नहीं हो पाई थी। जनवरी में कोर्ट ने कुर्की नोटिस चस्पा करने के आदेश दिए। पुलिस के नोटिस चस्पा करते ही पहले कालू व महेंद्र और फिर विजय, रम्मन व महराम ने गाजियाबाद कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। बृहस्पतिवार को सपा नेता विनोद यादव, यशदेव व मान सिंह ने भी सरेंडर कर दिया।

23 दिसंबर को कपिल हत्याकांड में फैसला आने वाला था, जिसमें मनीष व उनके बड़े भाई आशीष भी आरोपित थे। हालांकि दोनों को क्लीन चिट मिल गई थी। आरोप है कि इसी रंजिश में अदालत का फैसला आने से एक दिन पहले मनीष को गोली मारी गई। बम्हैटा में यह रंजिश 15 साल पहले सपा नेता विनोद यादव के भाई संजय की हत्या से शुरू हुई थी, जिसमें मनीष के पिता एवं बसपा पार्षद रामबीर यादव का नाम आया था। दो माह बाद उनकी भी हत्या कर दी गई थी। दोनों पक्षों में समझौता भी हुआ, लेकिन प्रॉपर्टी विवाद में 2014 में विनोद के चचेरे भाई कपिल की हत्या के बाद रंजिश फिर शुरू हो गई।

Posted By: Neel Rajput

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