गाजियाबाद, डा. रूमा गुप्ता। विभिन्न प्रकार के गैजेट्स हमारे जीवन का अहम हिस्सा हैं। बीते दो साल में कोरोना संक्रमण के चलते इनका प्रयोग और अधिक बढ़ गया है। आफिस कार्य, मनोरंजन, एजुकेशन आदि सब कुछ गैजेट्स पर निर्भर हो रहा है। बच्चों का ज्यादा से ज्यादा समय इन पर बीत रहा है।

गैजेट्स ने जीवन को आसान बना दिया है, लेकिन ये आंखों की सेहत भी बिगाड़ रहे हैं। लैपटाप, स्मार्टफोन, ई-रीडर और टैबलेट आंखों के लिए टीवी से ज्यादा खतरनाक हैं, क्योंकि इन्हें नजदीक से देखना पड़ता है। इनके प्रयोग के दौरान बैठने का तरीका सही नहीं रखने से आंखों से संबंधित समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

मिलेगी आंखों को राहत

  • हर 20 मिनट के बाद 20 सेकेंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर स्थित किसी चीज को देखें
  • कंप्यूटर या लैपटाप पर काम करते समय बैठने का तरीका सही रखें
  • कंप्यूटर की स्क्रीन आंखों से 15 डिग्री नीचे की तरफ रखें। स्क्रीन और आंखों के बीच कम से कम 25 इंच की दूरी रखें
  • ल्युब्रिकेंट ड्राप का इस्तेमाल करें। इससे आंखों में नमी बनी रहती है
  • लैपटाप को स्टैंड पर रखकर काम करें। यदि स्क्रीन छोटी है तो फांट साइज बड़ा रखें, इससे आंखों पर दबाव नहीं पड़ेगा
  • पानी व दूसरे तरल पदार्थों का सेवन अधिक मात्रा में करें
  • डाइट चार्ट में ताजी सब्जियों, फलों और दूध से बने उत्पादों को शामिल करें

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम: आंखें किसी एक बिंदु पर लगातार देखने को लेकर अनुकूलित नहीं होती हैं। कंप्यूटर-लैपटाप के सामने अधिक समय बिताने से कंप्यूटर विजन सिंड्रोम हो सकता है। इससे आंखों में भारीपन, धुंधला दिखना, जलन, पानी आना, पास की चीजें देखने में परेशानी होना आदि समस्याएं हो सकती हैं।

ड्राई आई सिंड्रोम: लगातार स्मार्टफोन के प्रयोग, अधिक देर तक कंप्यूटर पर काम करने या टीवी देखने से आंखों की टीयर फिल्म प्रभावित होती है। इससे आंखें सूखने लगती हैं। इसे ड्राई आई सिंड्रोम कहते हैं। इसमें आंखों में जलन, सूखापन, खुजली होना, भारीपन, आंखों में लालिमा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

Edited By: Sanjay Pokhriyal