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गाजियाबाद में नकली बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, बिना ISI मार्का के मिले 850 मीटर

इन मीटरों से बिजली चोरी करना आसान है। फैक्ट्री संचालक मीटर बनाने वाली नामी कंपनी इंडोटेक का नाम लिखकर बेच बेच रहा था। विद्युत निगम भी जांच किए बिना ही मीटरों को ग्राहकों के घर में लगाता रहा।

By Hasin ShahjamaEdited By: Abhishek TiwariPublished: Mon, 30 Jan 2023 12:48 PM (IST)Updated: Mon, 30 Jan 2023 12:49 PM (IST)
गाजियाबाद में नकली बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़, बिना ISI मार्का के मिले 850 मीटर
गाजियाबाद में नकली बिजली मीटर बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़

गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। राजेंद्र नगर औद्योगिक क्षेत्र में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) की छापेमारी में पकड़े गए नकली मीटरों को विद्युत निगम से टेंडर लेनी वाले ठेकेदारों को बेचा जा रहा था। इन मीटरों से बिजली चोरी करना आसान है। फैक्ट्री संचालक मीटर बनाने वाली नामी कंपनी इंडोटेक का नाम लिखकर बेच रहा था। विद्युत निगम भी जांच किए बिना ही मीटरों को ग्राहकों के घर में लगाता रहा। इस तरह बिजली चोरी को अंजाम दिया जा रहा था।

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बीआइएस की टीम ने बुधवार को राजेंद्र नगर में नकली बिजली के मीटर बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश किया था। फैक्ट्री से 600 मीटर बनती हुई हालत में पकड़े थे। जबकि 250 मीटर बने हुए थे। फैक्ट्री को सील कर मीटरों की प्रयोगशाला में जांच की गई। जांच में पता चला कि मीटरों पर आइएसआइ मार्क नहीं था।

6 महीने से चल रही थी फैक्ट्री

लाइसेंस नंबर फर्जी डाला गया था। मीटरों पर इंडोटेक कंपनी का नाम लिखा था। जिस वजह से असली-नकली में फर्क करना आसान नहीं था। छह माह पहले यह फैक्ट्री शुरू हुई थी। छह माह में इन मीटरों को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तराखंड सहित विभिन्न प्रदेशों में ठेकेदारों को बेचा गया है। इन ठेकेदारों को विद्युत निगम से टेंडर मिला हुआ था। आरोपित कम कीमत में मीटर बेच देते थे। इससे ठेकेदार को ज्यादा फायदा होता था। खराब गुणवत्ता के कारण मीटरों में लागत कम आती थी।

विद्युत निगम नहीं करता था जांच

बीआइएस के अधिकारियों का कहना है कि विद्युत निगम को मीटर लगाने से पहले उनकी जांच करनी चाहिए। बीआइएस केयर एप पर मीटर पर लिखा नंबर डालकर चेक करना चाहिए। यदि ठेकेदार नकली मीटर दे रहा है तो उसकी शिकायत बीआइएस के एप या अधिकारियों से करनी चाहिए। यदि मीटरों से बिजली चोरी हो रही है तो इससे विद्युत निगम और सरकार के राजस्व का नुकसान है।

ऐसे पकड़ में आए नकली मीटर

आरोपित ने शातिर अंदाज में इंडोटेक कंपनी का लाइसेंस नंबर और उसका नाम लिख रखा था लेकिन उसे पता नहीं था कि कंपनी में मीटरों पर क्रमांक नंबर भी लिखा जाता है। कंपनी का क्रमांक नंबर मिलान नहीं खा रहा था। उत्पादक का नाम भी गलत लिखा हुआ था। बीआइएस के सहायक निदेशक विशाल कुमार ने बताया कि फैक्ट्री संचालक के खिलाफ सभी सबूत एकत्रित कर लिए गए हैं। मीटरों का जांच नमूना सुरक्षित रख लिया है। अब वह कोर्ट में केस दायर करेंगे। वह इस तरह की अन्य फैक्ट्रियों को भी खंगाल रहे हैं।

बीआइएस सहायक निदेशक विशाल कुमार ने बताया कि हमें यह जानकारी प्राप्त नहीं हुई कि फैक्ट्री संचालक अभी तक कितने विद्युत मीटर खपा चुका है। जब्त मीटरों की जांच की गई है। फैक्ट्री संचालक मीटरों को विद्युत निगम के कांट्रेक्टरों को बेच रहा था।


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