यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 24, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
26 जुलाई से उत्तर प्रदेश में लागू होगी ई-वे-बिल प्रणाली
26 जुलाई से प्रदेश में ई-वे-बिल प्रणाली अनिवार्य हो जाएगी और व्यापारियों को माल के आवागमन पर विभिन्न फार्म भी रखने होंगे।

गाजियाबाद [शोभित शर्मा]। गुड्स एंड सर्विस टैक्स में भले ही माल के आवागमन पर विभिन्न फार्म की बाध्यता समाप्त कर दी गई हो लेकिन प्रदेश सरकार ने ई-वे-बिल लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। 26 जुलाई से प्रदेश में ई-वे-बिल प्रणाली अनिवार्य हो जाएगी और व्यापारियों को माल के आवागमन पर विभिन्न फार्म भी रखने होंगे।
कुल पांच तरह के फार्म ई-वे-बिल प्रणाली में व्यापारियों को ऑनलाइन जेनरेट करने होंगे। राज्य कर विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जब तक जीएसटी काउंसिल ई-वे-बिल तैयार नहीं करती है, तब तक यह व्यवस्था माल के परिवहन पर लागू रहेगी।
कुल पांच तरह के फार्म व्यापारियों को अब माल के आवागमन के लिए कॉमटैक्स की साइट पर जाकर जेनरेट करने होंगे। इसमें उत्तर प्रदेश के बाहर के किसी भी स्थान से प्रदेश के भीतर 5000 रुपये या उससे ज्यादा के मूल्य के कराधेय माल का परिवहन किए जाने और अभिवहन भंडारण पर ई-वे-बिल 01 रखा जाएगा।
उत्तर प्रदेश के अंदर या प्रदेश के किसी स्थान से राज्य के बाहर किसी स्थान तक एक लाख रुपये या उससे अधिक के मेंथा ऑयल, मेंथाल और डीएमओ, सुपारी, लोहा और इस्पात, सभी प्रकार के खाद्य तेल व वनस्पति घी के परिवहन पर ई-वे-बिल 02 साथ रखना होगा। ई-कॉमर्स आपरेटरों या उनके द्वारा अधिकृत परिवाहकों और कोरियर अभिकर्ताओं को माल का परिवहन करने की दशा में ई-वे-बिल 03 जेनरेट कर साथ रखना होगा।
शासन द्वारा जारी अधिसूचना में प्रदेश के बाहर किसी स्थान से राज्य के बाहर किसी स्थान पर 5000 रुपये या उससे अधिक मूल्य के कराधेय माल का परिवहन किए जाने की दशा में राज्य के भीतर माल का परिवहन किए जाने पर ट्रांजिट डिक्लरेशन फार्म टीडीएफ-01 रखा जाएगा और राज्य से माल की निकासी पर टीडीएफ-02 में सूचना प्रदान की जाएगी।
कॉम टैक्स से होंगे ई-वे-बिल जेनरेट
वैट में जिस तरह से फार्म-38, फार्म-21, ई-कॉमर्स फार्म और ई-संचरण लागू थे, ठीक उसी तरह से पुरानी बोतल में नई शराब का प्रयोग राज्य कर विभाग ने किया है। जीएसटी में इन्हें ई-वे-बिल का नाम दे दिया गया है। कॉम टैक्स की साइट से विभिन्न प्रारूप डाउनलोड करके माल के परिवहन के समय साथ रखे जाएंगे। ई-वे-बिल प्रणाली में नई चीज जो जोड़ी गई है, वो माल की समयावधि है, वैधता में ही माल का परिवहन किया जा सकेगा।
व्यक्तिगत उपयोग पर भी ई-वे-बिल की बाध्यता
ई-वे-बिल की बाध्यता केवल व्यापारियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अपने खुद के लिए राज्य से बाहर से 50,000 या इससे अधिक मूल्य का माल लाने पर लोगों को भी ई-वे-बिल जेनरेट कर साथ रखना होगा। 50,000 रुपये से कम के माल को यदि कोई व्यक्ति अपने निजी वाहन से निजी उपयोग के लिए राज्य के बाहर से लाता है, तो उसे अधिकारियों को अपना पहचान पत्र दिखाना होगा।
जीएसटी काउंसिल ने दिया अधिकारी
जीएसटी काउंसिल ने ई-वे-बिल को स्थगित कर दिया था लेकिन राज्यों को सुविधानुसार ई-वे-बिल प्रक्रिया के लिए अधिकृत किया गया था। इसके बाद बिहार में ई-वे-बिल जीएसटी लागू होने के साथ ही शुरू कर दिया गया। दिल्ली में ई-वे-बिल डी-2 लागू किया गया लेकिन व्यापारियों के दबाव में इसे वापस लेना पड़ा। उत्तर प्रदेश में 26 जुलाई से ई-वे-बिल व्यवस्था प्रभावी होगी।
