अपनों की चीखें और मलबे में दबी जिंदगी... मोदीनगर लिंटर हादसे से मातम में बदलीं दीवाली की खुशियां
गाजियाबाद के मोदीनगर में लिंटर गिरने से हुए हादसे में कई लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। ...और पढ़ें
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HighLights
मोदीनगर लिंटर हादसे में कई मजदूरों की मौत, परिवार सदमे में।
मालिक की लापरवाही से हुआ हादसा, जैक लगाने से मना किया।
अवैध निर्माण और अधिकारियों की अनदेखी ने बढ़ाई त्रासदी।
विकास वर्मा, मोदीनगर (गाजियाबाद)। एक तरफ मलबे का ढेर तो दूसरी तरफ अपनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में खड़े परिजन। एनडीआरएफ के सायरन की गूंज और अफरा-तफरी का माहौल। लिंटर गिरने के बाद घटनास्थल पर हर तरफ चीख-पुकार और बेचैनी का माहौल था।
मलबे के नीचे जिंदगी की तलाश में रेस्क्यू टीम लगातार अभियान चला रही थीं, वहीं बाहर खड़े कामगारों के परिजनों की निगाहें हर पल मलबे पर टिकी थीं। किसी को अपने पति के बाहर आने का इंतजार था तो कोई अपने बेटे और भाई की सलामती की दुआ कर रहा था।
रेस्क्यू टीम जब मलबे को हटाती तो परिजनों की धड़कनें बढ़ जातीं। हर हलचल के साथ उनके मन में एक ही सवाल उठता कि अंदर दबा उनका अपना सुरक्षित होगा या नहीं। दो घंटे तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच उम्मीद और आशंकाओं का सिलसिला चलता रहा। ठेकेदार की मौत की खबर ने परिवार की उम्मीदों को मातम में बदल दिया।
हादसे ने दीवाली पर परिवार की खुशियां छीन लीं। जिंदगी भर ना भूलने वाला दर्द दे दिया। घटनास्थल पर सिर्फ मलबा नहीं था, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदें और दर्द भी बिखरा पड़ा था, जिनके अपने रोजी-रोटी कमाने निकले थे। हादसे में कुछ कामगार तो इतने गंभीर घायल है कि जीवनभर शायद मजदूरी ना कर पाएंगे।

साहब... मालिक ने जैक लगाने से किया मना
साहब... मेरे बेटे गौरी शंकर ने मालिक से सेटिरंग के नीचे जैक लगाने के लिए कहा था। मकान की लंबाई-चौड़ाई अधिक थी। बिना जैक के सेटरिंग पर लिंटर डालना खतरनाक था। लेकिन मालिक ने जैक लगाने से मना कर दिया। मनमानी कर जबरन काम शुरू करा दिया। इसी वजह से हादसा हुआ। ये बातें बेटे गौरी शंकर की मौत के बाद पिता कैलाश ने अधिकारियों से कही। रोते हुए उन्होंने दर्द बयां किया। हादसे के जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
कैलाश ने कहा कि बेटा गौरी शंकर लंबे समय से सेटरिंग का काम कर रहा है। कभी सेटरिंग नहीं टूटी ना कभी हादसा हुआ। यहां लेंटर करीब 20 फीट ऊंचाई पर डाला जाना था। दो दिन पहले ही सेटरिंग का काम पूरा कर दिया था। लेकिन मालिक ने जैक का खर्च बचाने के लिए लगाने से मना कर दिया। इस मनमानी का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।
अधिकारियों की अनदेखी के बीच चलता रहा निर्माण
यह निर्माण कार्य काफी दिनों से चल रहा था। लेकिन अधिकारियों ने निर्माण कार्य की अनदेखी की। बिना विभागीय अनुमति के ही लिंटर डालने का काम चल रहा था। अनुमति नहीं थी, इसलिए मालिक ने भी मानकों को पूरा करने की जरूरत नहीं समझी। इसी तरह के तमाम निर्माण कार्य अब भी मोदीनगर-मुरादनगर में मानकों को दरकिनार करते हुए चल रहे हैं।
आसपा ने किया एसडीएम का घेराव
मृतक व घायल के परिवार के लोगों को मुआवजे की मांग को लेकर आजाद समाज पार्टी के पदाधिकारी व स्वजन ने तहसील में एसडीएम का घेराव किया। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। एसडीएम ने उन्हें किसी तरह शांत किया।
श्रम विभाग के अधिकारियों से वार्ता की। कहा कि साढ़े पांच लाख सहायता राशि मृतक के परिवार को दिलाने की पूरी कोशिश है। साथ ही घायलों के भी हर संभव मदद की जाएगी। काफी देर तक एसडीएम व पदाधिकारियों के बीच वार्ता हुई।
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