लोनी अस्पताल में परिवार नियोजन सेवाओं में भारी चूक, सीएमओ ने मांगा जवाब
गाजियाबाद के लोनी संयुक्त अस्पताल में प्रसवोत्तर परिवार नियोजन सेवाओं (पीपीआईयूसीडी) में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ...और पढ़ें

लोनी अस्पताल में परिवार नियोजन सेवाओं में लापरवाही ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
लोनी अस्पताल में पीपीआईयूसीडी सुविधा में लापरवाही।
अप्रैल से सितंबर 2026 तक शून्य प्रदर्शन।
सीएमओ ने अस्पताल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा।
मदन पांचाल, गाजियाबाद। प्रसव के बाद महिलाओं को परिवार नियोजन की सुविधा उपलब्ध कराने में 50 बेड़ेड संयुक्त अस्पताल लोनी का प्रदर्शन सवालों के घेरे में है।
अस्पताल की अप्रैल से सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट की समीक्षा में प्रसव के बाद गर्भाशय में कॉपर-टी लगाने की सुविधा यानी प्रसवोत्तर अंतर्गर्भाशयी गर्भनिरोधक उपकरण (पीपीआईयूसीडी) के मामले में स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा है।
अस्पताल की रिपोर्ट पर हुई चर्चा
मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 21 अक्टूबर को मेरठ मंडल के अपर निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में अस्पताल की रिपोर्ट पर चर्चा हुई थी।
समीक्षा के दौरान सामने आया कि अप्रैल से सितंबर तक प्रसव के बाद महिलाओं को पीपीआईयूसीडी की सुविधा उपलब्ध कराने में अस्पताल का प्रदर्शन शून्य रहा।
प्रसव के बाद परिवार नियोजन की सुविधा महिलाओं को अनचाहे गर्भ से बचने और अगली गर्भावस्था के बीच उचित अंतर रखने का विकल्प देती है।
महिलाओं को क्यों नहीं दी जा रही सुविधाएं
अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं को इस सुविधा की जानकारी देना और उनकी सहमति के आधार पर इसे उपलब्ध कराना परिवार नियोजन कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सीएमओ ने पत्र में अस्पताल प्रशासन से पूछा है कि स्वास्थ्य इकाई पर प्रसव के बाद महिलाओं को पीपीआईयूसीडी की सुविधा क्यों नहीं दी जा रही है।
खड़े हो रहे कई सवाल
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को स्वयं और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से स्पष्टीकरण लेकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आई यह स्थिति परिवार नियोजन सेवाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।
अब अस्पताल प्रशासन के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा कि छह महीने तक सुविधा उपलब्ध नहीं होने के पीछे क्या कारण रहे और सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
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