खोड़ा की पानी की प्यास बुझाएंगे गाजियाबाद-नोएडा, 17 ट्यूबवेल से घरों तक पहुंचेगा पेयजल
खोड़ा में पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए नगर पालिका अब गाजियाबाद और नोएडा से पानी लाने की तैयारी कर रही ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
खोड़ा में पेयजल आपूर्ति के लिए नई योजना।
गाजियाबाद और नोएडा से पानी लाने की तैयारी।
कुल 17 नए ट्यूबवेल लगाने की है योजना।
जितेंद्र सिंह, साहिबाबाद (गाजियाबाद)। खोड़ा में धराशायी पेयजल व्यवस्था के लिए अब नोएडा और गाजियाबाद से पेयजल आपूर्ति कराने की तैयारी में नगर पालिका है। क्षेत्र में करोड़ों खर्च करने के बाद भी घरों तक पानी नहीं पहुंच सका है।
इसके लिए ही नोएडा और गाजियाबाद से पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर शासन स्तर पर मंथन किया जा रहा है। योजना के तहत नगर पालिका परिषद गाजियाबाद या नोएडा में कुल 17 ट्यूबवेल लगाने की योजना बना रहा है।
पालिका के सूत्र बताते हैं कि नगर निगम गाजियाबाद और नोएडा प्राधिकरण से ट्यूबवेल लगाने के लिए एनओसी मांगी है। एनओसी मिलने के बाद योजना पर काम किया जाएगा। इसमें ट्रांस हिंडन के इंदिरापुरम के कनावनी के पास और खोड़ा से सटे नोएडा क्षेत्र में ट्यूबवेल लगाकर वहां से पाइपलाइन बिछाकर क्षेत्र में पानी पहुंचाने की तैयारी है।
नगर पालिका सूत्रों का कहना है कि गाजियाबाद या नोएडा में किसी एक जगह स्वीकृति मिलने पर 17 ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। अगर गाजियाबाद या नोएडा में स्वीकृति नहीं मिली तो दोनों जगह में कुल 17 जगह ट्यूबवेल लगाए जाने की योजना है।
खोड़ा में भी चल रहे हैं ट्यूबवेल और पाइपलाइन के काम
खाेड़ा के जिन वार्ड में भूजल स्तर ठीक है, वहां से पानी की आपूर्ति सभी वार्ड में करने के लिए भी काम चल रहे हैं। इसमें पहले फेज में 17 वार्डों में ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाकर पानी पहुंचाने की योजना का करीब 80 प्रतिशत काम हो चुका है।
वहीं, दूसरे फेज के लिए भी 40 करोड़ शासन से स्वीकृत हो चुके हैं। इस पर भी जल्द ही काम शुरू होगा। बता दें कि खोड़ा में पानी की सप्लाई न होने के कारण नगर पालिका परिषद द्वारा पानी के टैंकरों से आपूर्ति की जाती है।
बोतलबंद पानी खरीदने पर मजबूर लोग
इससे निवासियों की पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है। पीने के लिए लोगों को बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। खोड़ की आबादी को ध्यान में रखते हुए गाजियाबाद और नोएडा से भी पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पर मंथन किया जा रहा है।
कई वार्ड में भूजल स्तर एक हजार फुट तक चला गया है। इस कारण बोरिंग पर काफी खर्च आता है। साथ ही गिरते भूजल स्तर के कारण इसे बार-बार बोर कराना पड़ता है।
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