यूपी के सबसे बड़े बस अड्डे का हाल: कूड़े के ढेर, बदबू और महंगी दरों पर बिक रहा पानी
गाजियाबाद के कौशांबी बस अड्डे पर यात्रियों को गंदगी, अतिक्रमण और पीने के पानी की कमी जैसी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है।

कौशांबी डिपो का हाल। जागरण
HighLights
कौशांबी बस अड्डे पर यात्रियों को गंदगी और अतिक्रमण से परेशानी।
पानी की बोतलें 10 रुपये महंगी, वाटर कूलर अक्सर बंद।
40 हजार यात्रियों के लिए एक वाटर कूलर अपर्याप्त।
राहुल कुमार, साहिबाबाद। दिल्ली के आनंद विहार से सटे प्रदेश के सबसे बड़े कौशांबी अड्डे पर यात्रियों की अव्यवस्थाओं की मार झेल रहे हैं। अड्डे के परिसर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं तो कहीं अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं।
यहां तक की यात्रियों को जरूरत के हिसाब से हवा-पानी तक नहीं मिल पा रहे हैं। लोगों को दुकानों से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
कौशांबी डिपो पर केवल एक वाटर कूलर लगा है, जिसकी क्षमता यहां रोजाना पहुंचने वाले करीब 40 हजार यात्रियों के हिसाब से बहुत कम है। वाटर कूलर से यात्रियों को पानी नहीं मिल पाता तो कैंटीन से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है।
कैंटीन पर यात्रियों को महंगी मिलती है पानी की बोतल
कैंटीन पर यात्रियों को भी बोतलबंद पानी 10 रुपये महंगी बेची जाती है। पानी की जिस बोतल की कीमत 20 रुपये है उसे 30 रुपये में बेचा जा रहा है। यात्रियों को मजबूरी में कैंटीन से ही पानी खरीदना पड़ता है।
हापुड़ जाने वाले यात्री ने बताया कि यहां से हापुड़ का किराया करीब 50 रुपये हैं। इसके अलावा 30 रुपये का पानी भी खरीदना पड़ा है।
यात्री राकेश ने बताया कि वह अलीगढ़ जा रहे हैं। वाटर कूलर में पानी नहीं आ रहा था। इससे कैंटीन से ही पानी की बोतल खरीदनी पड़ी।
यानी यात्रियों पर पानी का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। बस अड्डे के कुछ कर्मियों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि कैंटीन संचालक को लाभ पहुंचाने के लिए वाटर कूलर को भी बीच-बीच में बंद कर दिया जाता है। रक्षाबंधन से पहले भी वाटर कूलर बंद पड़ा था।
जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर
कौशांबी डिपो में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। यात्रियों को गंदगी से होकर ही आना-जाना पड़ रहा है। दुर्गंध के कारण भी यात्रियों को नाक पर हाथ रखकर चलना पड़ता है। इसकी शिकायत यात्री करते हैं, लेकिन इस पर किसी भी अधिकारी का ध्यान नहीं जाता है। वहीं, अधिकारियों का दावा है कि बस अड्डे के परिसर में रोजाना साफ-सफाई कराई जाती है और कूड़े का उठान भी कराया जाता है।
कैंटीन संचालक ने कर रखा अतिक्रमण
डिपो पर यात्रियों की सुविधा के लिए कैंटीन बनी हुई हैं। कैंटीन संचालक अंदर का सामान बाहर रखकर रखते हैं। पानी की सैंकड़ों पेटियां बाहर रखी हुई हैं। कैंटीन पर रहने वाले कर्मी कपड़े तक बाहर सुखाते हैं। इससे यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानी होती है।
कैंटीन संचालक को अंदर सामान रखने के कड़े निर्देश हैं। पूर्व में नोटिस भी दिए गए हैं। फिर से नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी जाएगी। सफाई करने वाली फर्म को भी नोटिस जारी किया गया है। यात्रियों के लिए वाटर कूलर लगा हुआ है।
- अंशु भटनागर, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, कौशांबी डिपो।
