गाजियाबाद के किसान अपना रहे एकीकृत खेती मॉडल, बढ़ी कमाई के साथ खोल रहे विकास का रास्ता
गाजियाबाद में किसानों के लिए एकीकृत कृषि पद्धति आय बढ़ाने का मूल मंत्र बन गई है। घटते जोत के आकार ...और पढ़ें

कृषि विज्ञान केंद्र में स्थापित एकीकृत कृषि का मॉडल। जागरण
HighLights
एकीकृत कृषि से किसान एक साथ कई पैदावार पाते हैं।
छोटे खेत में भी आर्थिक लाभ और उद्यमिता संभव है।
मछली पालन, मुर्गी पालन और फसलें एक साथ उगाते हैं।
विजयभूषण त्यागी, मुरादनगर (गाजियाबाद)। कम होते जोत के आकार और रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल के कारण घटती मृदा गुणवत्ता के कारण परेशान किसानों के लिए एकीकृत कृषि आशा की किरण बनी हैं।
कम आकार के खेत में एकीकृत कृषि से किसान एक समय में चार पैदावार हासिल करके न केवल आर्थिक लाभ कमा रहे हैं, बल्कि उद्यमिता से जुड़कर विकास के नए रास्ते भी खोल रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के पास एकीकृत कृषि के संबंध में जानकारी हासिल कर रहे हैं।
बची है सीमित भूमि
तेज से फैलते नगरीय क्षेत्र और पुश्तैनी विभाजन के कारण क्षेत्र के किसानों के पास सीमित मात्रा में भूमि रह गई है। कृषि विभाग के अनुसार, गाजियाबाद क्षेत्र में प्रति किसान कृषि भूमि का आकार साढ़े सात बीघा है।
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कम भूमि में पारंपरिक फसलें उगाकर किसान अपने परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में एकीकृत कृषि से किसान भूमि के छोटे से टुकड़े में एक साथ तीन या चार तक पैदावार करके प्राप्त कर सकते हैं।
दुहाई गांव की रहने वाली महिला किसान मंजू यादव लंबे समय से एकीकृत कर रही हैं। कृषि के क्षेत्र के नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंजू यादव को अलग अलग सरकारी व निजी मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है।
इस प्रकार होती है एकीकृत कृषि
यदि किसी किसान के पास आधा बीघा जमीन है, तो उसे तालाब में तब्दील कर मछली पालन कर सकता है। मछलियों के साथ ही तालाब के पानी में सिघांड़े और मखाने उगाए जाते हैं।
खेत के चारों किनारे पर पोपलर के पेड़ उगाए जा सकते हैं और पेड़ों के तनों पर तार बांधकर उनमें बेलदार सब्जियों को उगाया जा सकता है। तालाब के कोने में बाड़ा लगाकर मुर्गियां पाली जा सकती है।
इतना ही नहीं मुर्गियों के अपशिष्ट को मछलियों के लिए चारे के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इस पद्धति प्रत्येक अपशिष्ट का इस्तेमाल उत्पाद के रूप में किया जा सकता है।
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एकीकृत कृषि नवाचार संबंधित तकनीक है, आने वाले समय में कृषि भूमि और भी कम होगी। ऐसे में छोटे किसान इस प्रकार की तकनीक को अपनाकर अपने लिए आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
पीके कुंडू, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, मुरादनगर
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