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खेती में क्रांतिकारी बदलाव: जलवायु परिवर्तन और गिरते जलस्तर के बीच 'DSR' तकनीक बनी उम्मीद की किरण

Published: Mon, 09 Mar 2026 12:12 AM (IST)

वाराणसी में आयोजित नीति संवाद में धान की सीधी बोआई (डीएसआर) तकनीक को जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण और किसानों की ...और पढ़ें

आईसार्क में चले नीति संवाद में “ग्लोबल डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कान्क्लेव” की प्रोसीडिंग्स का विमोचन करते अतिथिगुण

आईसार्क में चले नीति संवाद में “ग्लोबल डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कान्क्लेव” की प्रोसीडिंग्स का विमोचन करते अतिथिगुण

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जागरण संवाददाता, वाराणसी। धानी की सीधी बोआई (डीएसआर) जलवायु परिवर्तन, पानी की खपत, गुणवत्तायुक्त अधिक उत्पादन, खेती में कम लागत व अधिक लाभ के लिए रामबाण उपाय है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन सहित धान की खेती संबंधी अधिकांश समस्याएं हल होंगी, वरन किसान भी कम लागत में अधिक उत्पादन पाकर सबल होंगे। देश और समृद्ध होगा।

इसे सरकार को अपनी नीति में शामिल कर व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय धान अनुसंधान संस्थान के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (आईसार्क) में आईसार्क व इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारत में टिकाऊ एवं सुदृढ़ धान प्रणाली के लिए धान नीतियों का पुनर्गठन : सीख और प्राथमिकताएं’ विषय पर चल रहे दो दिवसीय नीति संवाद का यही निष्कर्ष रहा।

इसमें शामिल देश-दुनिया के वरिष्ठ कृषि विज्ञानियों, कृषि आर्थिकी के विशेषज्ञोंं, निर्यातकों व किसानों ने मिलकर इस निष्कर्ष पर मुहर लगाई।

वरिष्ठ कृषि विज्ञानी पद्मश्री डॉ. एके सिंह ने कहा कि धान किसानों के लिए समय पर पानी की उपलब्धता और उन्नत तकनीकों का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है। इसके लिए डीएसआर सर्वाधिक कारगर तकनीक साबित हुई है। प्रदेश में बासमती धान की खेती की बड़ी संभावनाएं हैं, जिससे किसानों की आय बढ़ाने और राज्य के धान क्षेत्र को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

प्रदेश सरकार को चाहिए कि पश्चिम के 27 जिलों को केवल बासमती की खेती के लिए आरक्षित कर दे। आईसीआरआईईआर के विशिष्ट प्रोफेसर डॉ. अशोक गुलाटी ने देश में डीएसआर को प्रभावी ढंग से बढ़ाने के लिए चार प्रमुख स्तंभों नीति, उत्पाद, व्यवहार/प्रयोग और साझेदारी आधारित रणनीति पर बल दिया।

सिर्स इरी के शोध निदेशक डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि डीएसआर को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय मंच और बहु-हितधारक नेटवर्क बेहद महत्वपूर्ण हैं।

इनके अतिरिक्त निदेशक आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र और नीति अनुसंधान संस्थान डॉ. शिव कुमार, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव राज कंबोज, कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के निदेशक डॉ. यूपी सिंह, महानिदेशक फेडरेशन ऑफ सीड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया डॉ. परेश वर्मा आदि ने भी अपने विचार दिए।

कार्बन क्रेडिट पहल पर हुई चर्चा, जारी होगा श्वेत पत्र

दो दिवसीय आयोजन में 'ग्रो इंडिगो' कार्बन क्रेडिट पहल पर भी चर्चा हुई, जो डीएसआर तकनीक को बढ़ावा देकर किसानों द्वारा इसे अपनाने पर सीधा लाभ पहुंचाती है। विशेषज्ञों और राज्यों की टीमों ने मिलकर स्पष्ट और व्यावहारिक नीतिगत सुझाव तैयार किए, जो आगे तैयार होने वाले राज्य-स्तरीय श्वेत पत्रों का आधार बनेंगे।

आईसार्क निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने कहा कि इस संवाद से प्राप्त सुझावों और अनुभवों के आधार पर आगे श्वेत पत्र और रणनीतिक नीति दस्तावेज तैयार किए जाएंगे, जो भविष्य में सरकार और संबंधित संस्थानों को निर्णय लेने और कार्यक्रम लागू करने में मार्गदर्शन देंगे।

डीएसआर ग्लोबल कॉन्क्लेव की प्रोसिडिंग्स का हुआ विमोचन

सम्मेलन में अतिथियों द्वारा बीते वर्ष पांच से सात अक्टूबर को आईसार्क में हुए “ग्लोबल डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) कान्क्लेव” की प्रोसीडिंग्स का भी विमोचन किया गया। इसमें जलवायु-अनुकूल और संसाधन-कुशल डीएसआर प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक अनुभव, शोध निष्कर्ष और नीतिगत सुझाव शामिल हैं।

विज्ञानियों व विशेषज्ञों के निष्कर्षों का संज्ञान लेगी सरकार, धान नीति में करेगी शामिल: अवनीश अवस्थी

समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नई तकनीकों और बेहतर नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो राज्य के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक होंगी।

धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, इससे पानी की बचत होगी, उत्पादकता बढ़ेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। राज्य सरकार मशीनों के उपयोग के माध्यम से डीएसआर को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की योजना बना रही है। विज्ञानियों व विशेषज्ञों के निष्कर्षों काे संज्ञान में लेकर भावी धान नीति में शामिल करने पर विचार होगा।

प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि रविंदर ने कहा कि कृषि नीति निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों सहित कई हितधारक शामिल होते हैं। ऐसे नीति-संवाद मंच सार्थक विचार-विमर्श और सूचित नीतिगत सुधारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।