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हवाला, हथियार और गैंग्स्टर: देशभर में फैल रहा आतंक का नया तंत्र, एजेंसियों की बढ़ी टेंशन

Published: Tue, 14 Apr 2026 06:41 AM (IST)

भारत में पाकिस्तानी/खालिस्तानी आतंकियों और भारतीय गैंगस्टरों के बीच एक खतरनाक त्रिकोणीय गठजोड़ सामने आया है। यह गठजोड़ नकली मुद्रा, ...और पढ़ें

सरफराज उर्फ जोरा सिंह उर्फ सरदार, शहजाद भट्टी व फरातुल्ला घोरी।

सरफराज उर्फ जोरा सिंह उर्फ सरदार, शहजाद भट्टी व फरातुल्ला घोरी।

HighLights

  1. आतंकियों और गैंगस्टरों का देश विरोधी गठजोड़ सक्रिय।

  2. ISI गैंगस्टरों से जासूसी, नकली नोट, हथियारों का धंधा करा रहा।

  3. सुरक्षा एजेंसियां इस खतरनाक नेटवर्क को तोड़ने में जुटीं।

जागरण संवददाता, साहिबाबाद (गाजियाबाद)। पहले पाकिस्तानी और खालिस्तानी आतंकियों का गठजोड़ और अब आतंकियों से भारतीय गैंग्सटर की जुगलबंदी से देश में खतरा बढ़ गया है। इस त्रकोनीय गठजोड़ को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सिरदर्दी बढ़ गई है।

रुपयों, नशा व हथियारों के कारोबार की चाह में गैंग्सटर आतंकियों के लिए काम कर रहे हैं और अपने हितों को साधने के लिए देश विरोधी गतिविधियों में भी शामिल हो रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है।

इसको लेकर एजेंसियों ने जांच तेज कर दी है और पूरे नेक्सेस को तोड़ने के प्रयास में एजेंसियां जुटी हुई हैं।

सूत्र बता रहे हैं क आतंकियों की सदियों दूसरे देशों में आतंकी गतिविधियों के लिए जाली करेंसी, नशा और हथियारों के कारोबार का धंधा बढ़ा देते हैं।

कुछ समय पूर्व तक पाकिस्तान, खालिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में बैठे हुए आतंकी अपने नेटवर्क के माध्यम से यह धंधा चला रहे थे, लेकिन कुछ समय में इन नेटवर्क को ध्वस्त करने के बाद अब आतंकियों ने पैटर्न बदल दिया है।

अब आतंकियों ने विदेश व भारत में बैठे हुए गैंग्सटरों की मदद से आतंकी गतिविधियां शुरू कर दी हैं। आतंकी गैंग्सटरों को सस्ते दामों में जाली करेंसी, हथियार व नशा उपलब्ध करा रहे हैं।

गैंग्सटर अपने गुर्गाें से इसे देश में खपाकर न केवल मोटा मुनाफा कमा रहे हैं बल्कि देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

फिजिकल व डिजिटल नेटवर्क कर रहे तैयार

आइएसआइ, आइसिस, पाकिस्तान इंटेलीजेंस आपरेटिव, जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, बब्बर खालसा इंटरनेशनल समेत अन्य खालिस्तानी समर्थक आतंकी संगठन भारत में गैंग्सटरों व इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपना फिजिकल व डिजिटल नेटवर्क तैयार कर रहे हैं और आतंकी साजिश को अंजाम देने के लिए रेलवे स्टेशनों, सैन्य ठिकानों समेत अन्य स्थानों की जासूसी करा रहे हैं।

सरहद पार बैठे आतंकी हैंडलर्स गैंग्सटरों को मोटी रकम, अत्याधुनिक हथियार तो उपलब्ध करा ही रहे हैं साथ ही विदेश में बसाने का लालच देकर इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। हाल में ही अंसारी नाम के हथियार सप्लायर के 14 गुर्गे पकड़े गए थे, इसका भी आतंकी कनेक्शन सामने आया था।

गैंग्सटरों के जरिये ही आतंकियों को देश भर में खासकर एनसीआर में पनाह मिल रही है, जिससे आतंकियों को जासूसी कराने में आसानी हो रही है। कुछ साल पहले सरकार गोल्डी बराड़, लखबीर सिंह रिंडा और अर्श डल्ला जैसे कई बड़े गैंग्सटरों को आतंकवादी घोषित कर चुकी है।

ISI के लिए काम कर रहे काम 

खालिस्तानी आतंकवादियों की आड़ में आइएसआइ भारत में दहशतगर्दी की साजिश रच रहा है। इस नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान में बैठे सरफराज उर्फ सरदार उर्फ जोरा सिंह, पाकिस्तानी गैंग्सटर एवं आतंकी शहजाद भट्टी, विकार उर्फ विक्की जट समेत अन्य का नाम सामने आ चुके हैं।

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विक्की जट इस नेटवर्क का मुख्य हैंडलर है जो पाकिस्तान इंटेलीजेंस आपरेटिव (पीआइओ) से जुड़ा है, वह खालिस्तानी लिबरेशन फ्रंट से जुड़ा भी बताया गया है। आतंकियों की लोकेशन नेपाल, दुबई, कनाडा, मलेशिया, पाकिस्तान में आ रही हैं।

साजिश के लिए हवाला के जरिये पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते फंडिंग हो रही है। पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते हथियार और गोला-बारूद भी आ रहा है।

शहजाद और लारेंस बिश्नाेई में हुई दुश्मनी

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूर्व में पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी और भारतीय गैंग्सटर लारेंस बिश्नोई में दोस्ती थी। पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों के बीच दुश्मनी हो गई और दोनों एक दूसरे की जान के दुश्मन बन गए। लारेंस ने हमले का विरोध किया था।

सूत्र बता रहे हैं कि लारेंस के भाई अनमाेल बिश्नोई ने शहजाद पर पुर्तगाल में पिछले साल हमला भी कराया था, जिसमें वह बच गया था। अब आइएसआइ के एजेंट अपने गुर्गाें से लारेंस बिश्नोई के नाम का इस्तेमाल कर देश में जासूसी करा रहे हैं।

कौशांबी से जब पुलिस ने जासूसी नेटवर्क पकड़ा तो उनके मोबाइल में मिले वाट्सएप ग्रुप का नाम भी लारेंस बिश्नोई-007 के नाम से मिला था।

लश्कर व जैश को हमले की जिम्मेदारी

आइएसआइ, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा भारत में आतंकी हमले की साजिश रच रहे हैं। आइएसआइ हमलों के लिए जासूसी व रेकी करा रहा है जबकि जैश व लश्कर को हमलों को अंजाम देना है। सूत्र बता रहे हैं कि तीनों आतंकी संगठन भारत में अपना नेटवर्क स्थापित कर रहे हैं।

जैश-ए-मोहम्मद देश में हमलों के लिए डिजिटल स्लिपर सेल माड्यूल तैयार कर रहा है जबकि आइएसआइ फिजिकल नेटवर्क माड्यूल के माध्यम से विभिन्न सैन्य ठिकानों की रेकी करा रहा है।

फरातुल्ला घोरी व मोहम्मद उमर रच रहे हैं साजिश

मसूरी के नाहल से एजेंसियों ने 12 मार्च को एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने नाहल गांव से छह आतंकियों को गिरफ्तार किया था। आरोपितों के मोबाइल फोन में वाट्सएप ग्रुप मिले थे, जिसमें आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप के वीडियो प्रसारित किए गए थे।

आरोपित जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े व अक्षरधाम आतंकी हमले के मुख्य आरोपित फरातुल्ला घोरी आतंकी व कट्टरपंथी ग्रुपों को फालो कर रहे थे। सूत्र बता रहे हैं कि फरातुल्ला घोरी के साथ जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर का भतीजा आतंकी मोहम्मद उमर आतंकी हमले की साजिश रच रहा था।

पकड़े गए मुख्य आरोपित शावेज ने एक आतंकी संगठन के सदस्य द्वारा कहने पर अपने मोबाइल में सिग्नल एप डाउनलोड किया, जिसे आतंकी इस्तेमाल करते हैं। इसके माध्यम से आतंकी संगठनों के वीडियो डाउनलोड कर वह अपने कोर ग्रुप पर जुड़े अन्य सदस्यों को ट्रेनिंग देता था।

इंटरनेट मीडिया पर सर्चिंग के दौरान उसका संपर्क फरातुल्ला घोरी के ग्रुप के सदस्य आफताब आलम से हुआ। उसके कहने पर शावेज ने सिग्नल एप डाउनलोड की।

एप पर उसने जैश-ए-मोहम्मद, हमजा, फरातुल्ला घाेरी, अजहर मसूद, स्वात-उल-हक समेत अन्य ग्रुपों व चैनल पर शावेज ने जुड़ने का प्रयास किया था। उसके मोबाइल फोन में इकराम एडी नाम के एक आतंकी की बातचीत भी मिली थी।

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