सिसकती हरनंदी की छठ पर ही क्यों आती है याद? शासन-प्रशासन से अपनी बदहाली पर सवाल कर रही नदी
गाजियाबाद की हरनंदी नदी अपनी बदहाली पर सिसक रही है, जो कभी निर्मल जल के लिए जानी जाती थी। पूरे ...और पढ़ें

हरनंदी की व्यथा ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
हरनंदी नदी गाजियाबाद में प्रदूषण से जूझ रही है।
छठ पर्व पर गंगाजल से इसकी सफाई की जाती है।
रोजाना भारी मात्रा में सीवेज नदी में गिरता है।
हसीन शाह, गाजियाबाद। मैं हरनंदी नदी हूं। मेरी पहचान कभी शीशे की तरह पारदर्शी और निर्मल जल के रूप में होती थी। आज मैं अपनी बदहाली पर सिसक रही हूं।
शहर के भौगोलिक विस्तार के साथ-साथ मुझे दूषित करने का पाप भी गाढ़ा होता गया। जिसके प्रत्यक्ष और परोक्ष भागीदार व्यवस्था के नुमाइंदों से लेकर आम नागरिक तक हैं।
हर्ष वर्ष मुझे कागजों पर खींचा जाता है
हर वर्ष कागजों पर मुझे पुनर्जीवित करने के भव्य खाके खींचे जाते हैं। लेकिन, वे कभी जमीन पर उतरने का सौभाग्य नहीं पा सके। आगामी छठ पर्व पर लाखों आस्थावान एक बार फिर मेरे काले और जहरीले पानी के बीच खड़े होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे।
प्रशासनिक और नैतिक गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए एक बार फिर वही पुरानी औपचारिकता दोहराई जा रही है। मुझे साफ करने के लिए गंगाजल से मुझे स्नान कराया जाएगा, जबकि मुझे गंदा करने में मेरा कोई गुनाह नहीं है... ये शब्द उस बेबस हरनंदी के हैं, जिसकी आवाज इस गूंगे बहरे सिस्टम को सुनाई नहीं दे रही है।
हर वर्ष दोहराई जा रही विडंबना
छठ से ठीक दो दिन पहले नदी को साफ करने के लिए उसमें गंगनहर से 150 क्यूसेक गंगाजल छोड़ा जाएगा। यह रस्म अदायगी का खोखला क्रम पिछले 13 वर्षों से बदस्तूर जारी है। इस बार 14वें वर्ष भी यही विडंबना दोहराई जा रही है।
यदि प्रशासन से लेकर जन-सामान्य तक हरनंदी को सचमुच पावन करने का दृढ़ संकल्प लेते तो आज नदी में कृत्रिम जलधारा के सहारे की भीख न मांगनी पड़ती।
150 क्यूसेक छोड़ा जाएगा गंगाजल
छठ पर्व से पूर्व गंगनहर से 150 क्यूसेक गंगाजल छोड़ने की तैयारी पूरी कर ली गई है। जिले की सीमा क्षेत्र से रोजाना लगभग 400 से 450 मिलियन लीटर प्रतिदिन बिना शोधित सीवेज और जहरीला औद्योगिक कचरा सीधे इस नदी में उड़ेला जा रहा है।
शहरी निकाय क्षेत्र से रोजाना लगभग 246 मिलियन लीटर प्रतिदिन दूषित पानी सीधे नदी में डाला जा रहा है। नौ से 10 बड़े नालों के पानी को सीधे इस नदी में बिना शोधित किए डाला जा रहा है।
इनमें अर्थला, करहेड़ा, इंदिरापुरम, प्रताप विहार, हिंडन विहार, कैला भट्टा, नंदग्राम, राहुल विहार और सिटी फारेस्ट क्षेत्र के नाले प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इसके साथ ही लोनी क्षेत्र के तमाम अनधिकृत और अधिकृत नाले भी इसमें भारी मात्रा में भारी धातुएं और रसायन उड़ेल रहे हैं। बीते 13 वर्षों से हर साल छठ पर्व के ठीक दो दिन पहले गंगनहर का पानी छोड़ दिया जाता है, ताकि करहेड़ा, सिटी फारेस्ट और हिंडन बैराज स्थित घाटों पर जलस्तर व गुणवत्ता में कुछ सुधार हो सके।
