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गाजियाबाद के प्रदीप यादव: 14 साल बिस्तर पर रहने के बाद पैरा खेलों में जीता रजत पदक

Published: Wed, 21 Oct 2026 04:13 PM (IST)

गाजियाबाद के प्रदीप यादव, जो 2003 में रीढ़ की हड्डी की चोट के कारण 14 साल बिस्तर पर रहे, उन्होंने इंटरनेट मीडिया से प्रेरणा लेकर पैरा खेलों में कदम रखा।

14 साल बिस्तर पर रहने के बाद पैरा खेलों में जीता रजत पदक ( एआई जेनरेटेड इमेज )

14 साल बिस्तर पर रहने के बाद पैरा खेलों में जीता रजत पदक ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. 2003 में चोट से 14 साल बिस्तर पर रहे प्रदीप।

  2. इंटरनेट मीडिया से प्रेरित होकर पैरा खेलों में आए।

  3. एशियन पैरा गेम्स में भाला फेंक में रजत पदक जीता।

शाहनवाज अली, गाजियाबाद। जिले के सुठारी गांव के रहने वाले प्रदीप यादव की जिंदगी एक हादसे के बाद बदल गई। बात 12 अप्रैल 2003 की है, जब गोली लगने से उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई और कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर गया।

करीब 14 वर्ष तक बिस्तर पर रहने के बाद उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर बिना हाथ और पैर के अलावा दृष्टबाधितों को देश के लिए खेलते हुए देखा।

प्रदीप ने कई कीर्तिमान किए स्थापित

इसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने खेलों का रूख किया और भाला फेंक और शाटपुट में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक देश के नाम किए। प्रदीप ने जापान में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीता है।

प्रदीप यादव के लिए बिस्तर से खेल के मैदान तक का सफर आसान नहीं रहा। इन खिलाड़ियों को देखकर उनके मन में भी खेल के माध्यम से अपनी पहचान बनाने की इच्छा जगी। इसके बाद उन्होंने अभ्यास शुरू किया और धीरे-धीरे प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने लगे।

प्रदीप ने मोदीनगर में भाला फेंक प्रशिक्षक कृष्ण पालीवाल से प्रशिक्षण लिया। उनकी लगन और अभ्यास के प्रति समर्पण को देखते हुए प्रशिक्षक ने उन्हें खेल की बारीकियां सिखाईं।

लगातार मेहनत का परिणाम रहा कि प्रदीप ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने शुरू किए। वह पैरा स्टेट चैंपियनशिप में पांच बार चैंपियन रह चुके हैं।

आर्थिक चुनौतियों के बीच जारी है संघर्ष

किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रदीप की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है। खेल में उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद प्रशिक्षण और अन्य जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती है।

प्रदीप के अनुसार, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के बाद भी उन्हें शासन-प्रशासन से अपेक्षित आर्थिक सहायता नहीं मिली है।

वर्तमान में वह फरीदाबाद के सेक्टर-12 खेल परिसर में पैरा एथलीट रंजीत भाटी के साथ तैयारी करते हैं। एशियन पैरा गेम्स में रजत पदक जीतना उनके लंबे संघर्ष और निरंतर मेहनत का परिणाम है।

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