गाजियाबाद में खुला पहला गोबर प्लांट, 150 टन गोबर से तैयार होगा 70 टन बायोफ्यूल; गंदगी और बदबू से भी मिलेगी राहत
गाजियाबाद में पहले गोबर प्रोसेसिंग प्लांट का उद्घाटन किया गया। इससे प्रतिदिन 150 टन गोबर से 70 टन बायोफ्यूल बनाएगा।
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गाजियाबाद में बना पहला गोबर प्लांट। फोटो-दैनिक जागरण
HighLights
गाजियाबाद में पहला गोबर प्रोसेसिंग प्लांट हुआ शुरू।
प्रतिदिन 150 टन गोबर से बनेगा 70 टन बायोफ्यूल।
वेस्ट-टू-वेल्थ मॉडल से शहर को मिलेगी स्वच्छता व राजस्व।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। कवि नगर जोन में स्थापित गाजियाबाद नगर निगम के पहले गोबर प्रोसेसिंग प्लांट में लगी तीन मशीनों की मदद से अब प्रतिदिन 150 टन से अधिक गोबर का निस्तारण किया जाएगा।
गोबर से रोजाना 70 टन से अधिक बायोफ्यूल बनकर तैयार होगा। इसक इस्तेमाल विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में ईंधन के रूप में किया जाएगा। मंगलवार को महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त द्वारा इस संयंत्र का उद्घाटन किया गया।
5 जोन में लगेगा 25 मशीनें
अब शहर के अन्य सभी पांचों जोन में भी कुल 25 मशीनें लगाकर इस योजना का विस्तार किया जाएगा। सड़कों और नालियों में गोबर बहने के कारण शहर में गंदगी और बदबू की गंभीर समस्या बनी रहती थी।
स्थानीय निवासियों की लगातार मिल रही शिकायतों का स्थायी समाधान निकालते हुए नगर निगम ने इस वेस्ट-टू-वेल्थ माडल को धरातल पर उतारा है।
बायोफ्यूल और खाद से निगम का बढ़ेगा राजस्व
यह पूरा प्लांट सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी ट्रिपल पी मॉडल पर कार्यदायी संस्था के सहयोग से शुरू किया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस संयंत्र को स्थापित करने में नगर निगम को अपनी जेब से कोई भी फंड खर्च नहीं करना पड़ा है, जबकि तैयार बायोफ्यूल और खाद से निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।
गोबर से बायोफ्यूल बनने के बाद बचे हुए वेस्ट से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी। जिसे शहर की नर्सरियों और पार्कों के पेड़-पौधों में उपयोग में लाया जाएगा।
पशुपालकों को मिलेगी राहत
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्लांट से शहर में पशुपालकों को राहत मिलेगी। पशुपालकों से अपील की गई है कि वह अपने गोबर को नालियों में बहाने के बजाय सीधे इस प्लांट तक पहुंचाएं। इस मौके पर अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. मिथिलेश व उद्यान प्रभारी डा. अनुज मौजूद रहे।