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गाजियाबाद में पानी की गुणवत्ता पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर, 7 साल में 8661 नमूनों की हुई जांच

Published: Thu, 19 Mar 2026 07:33 PM (GMT+05:30)

स्वास्थ्य विभाग गाजियाबाद में पानी की गुणवत्ता जांच को लेकर गंभीर है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जांच बढ़ने से नमूने कम फेल हो रहे हैं।

पानी की नमूने लगातार लिए जा रहे हैं। (फाइल फोटो)

पानी की नमूने लगातार लिए जा रहे हैं। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पानी की जांच बढ़ने से कम हो रहे नमूने फेल

  2. जनवरी और फरवरी में 142 नमूने हुए फेल

  3. दूषित पानी से जलजनित बीमारियों का बढ़ता खतरा

मदन पांचाल, गाजियाबाद। लोगों की सेहत संवारने और पानी की गुणवत्ता जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर है। स्थानीय स्तर पर पानी की जांच करने को लगातार नमूने लिये जा रहे हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की जांच बढ़ने से नमूने कम फेल हो रहे हैं। वर्ष 2019 में जहां केवल 436 नमूने जांच को लिये गये थे।

वहीं पर 2024 में 2093 और 2025 में 2003 पानी के नमूने लेकर जांच को भेजे गये। इस वर्ष में पानी के 3000 नमूने लेकर जांच कराने की तैयारी है। चालू वित्त वर्ष की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी और फरवरी में जांच को लिये गये 822 में से केवल 142 नमूने फेल हुये हैं।

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संजयनगर स्थित संयुक्त अस्पताल की आइडीपीएल लैब में 24 घंटे पानी की बायोलाजिकल जांच की जा रही है। हालांकि जिले में पानी की रासायनिक जांच को कोई सरकारी लैब नहीं है।स्वास्थ्य विभाग बायोलाजिकल जांच जिला पब्लिक हेल्थ लैब को इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में विलय कर दिया गया है।

इस लैब में माइक्रोबायोलाजिस्ट डॉ. सुरूचि सैनी द्वारा पानी की जांच इनक्यूबेटर से एचटूएस विधि से की जाती है। जांच रिपोर्ट 72 घंटे में आती है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले सात साल में लिए गए 8661 पानी के नमूनों के सापेक्ष 2157 नमूने जांच में फेल पाये गये हैं। 6494 नमूने जांच में सही पाए गए।

स्वच्छ पेयजल आपूर्ति को ध्यान में रखकर टीमें रोज पानी के नमूने एकत्र करके लैब को भेज रहीं हैं। गर्मी की दस्तक के साथ जांच की संख्या बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सोसायटी एवं व्यक्ति को नोटिस जारी करके स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के सख्त निर्देश दिये जाते हैं। नगर निकायों को भी पत्र भेजा जाता है।दूषित पानी पीने से जलजनित और संक्रामक रोग फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इससे टाइफाइड और डायरिया होता है। शुरुआत में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और जी मिचलाना होता है। हेपेटाइटिस ए और ई का खतरा बढ़ जाता है।


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-डॉ. आरके गुप्ता, जिला सर्विलांस अधिकारी