गाजियाबाद: श्मशान में सुविधाओं का भी अंतिम संस्कार, नहीं हुए निर्माण
गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में श्मशान घाटों पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए आने ...और पढ़ें

शक्ति खंड-4 श्मशान घाट।
HighLights
ट्रांस हिंडन क्षेत्र के श्मशान घाटों पर मूलभूत सुविधाओं की कमी।
पानी, बैठने की व्यवस्था और प्लेटफार्म जैसी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं।
शक्तिखंड-4 और करहेड़ा श्मशान घाटों की स्थिति जर्जर।
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बढ़ती आबादी और विकास योजनाओं के बीच श्मशान अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सुविधा का कोई काम नहीं कराया गया।
ऐसे में बदहाली का आलम यह है कि न तो लोगों के लिए यहां पानी की सुविधा है और न ही बैठने के लिए कोई व्यवस्था। मार्ग में गड्ढे हैं और शव के लिए प्लेटफार्म तक नहीं बने हैं।
इंदिरापुरम शक्तिखंड-4, करहेड़ा, झंडापुर, कड़कड़ माडल, साहिबाबाद गांव, मोहननगर, वैशाली और वसुंधरा समेत अन्य इलाकों में लाखों की आबादी के बीच मोक्षस्थलों को विकसित नहीं किया जा रहा है।
शक्तिखंड-4 मोक्षस्थली है काफी जर्जर
शक्तिखंड-4 स्थित मोक्षस्थली अंदर से काफी जर्जर है और प्लेटफार्म, पानी, बिजली, हरित शवदाह प्रणाली जैसी सुविधाएं इसमें नहीं हैं। ऐसे ही करहेड़ा में हरनंदी किनारे श्मशान घाट पर प्लेटफार्म नहीं बढ़ाए जा रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि शव के संस्कार के लिए हरित शवदाह प्रणाली भी यहां नहीं लगी है। शव के अंतिम संस्कार के लिए बार्डर एरिया से दिल्ली, इंदिरापुरम से नोएडा और और साहिबाबाद समेत अन्य जगह से शव हिंडन मोक्षस्थली लाए जाते हैं।
साहिबाबाद के मोक्षस्थली में चिता जलाने के लिए प्लेटफार्म तक नहीं हैं। ऐसे में कई बार हिंडन मोक्षस्थली पर प्लेटफार्म भरने पर लोग एक से दूसरी जगह भटकते हैं।
नगर निगम के मुख्य अभियंता एनके चौधरी ने बताया कि सभी जोन में मोक्षस्थली पर कार्याें के प्रस्ताव हैं। जल्द ही इनमें कार्याें को शुरू कराया जाएगा।
यह गंभीर मसला है। ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बड़ी आबादी रहती है और शोक के समय संस्कार के लिए समस्या झेलती है। मोक्षस्थली के लिए कई बार बजट जारी हुआ लेकिन काम नहीं हुए।
- सुदर्शन अवस्थी, महासचिव, गाजियाबाद वेलफेयर एसोसिएशनशक्तिखंड-4 में श्मशान के नाम पर केवल गेट बंद भूमि है। लोग यहां जाने के बजाय नोएडा या हिंडन मोक्षस्थली जाते हैं लेकिन कई बार पता चलता है कि वहां प्लेटफार्म भरे हुए हैं।
- वरुण त्यागी, सचिव, गाजियाबाद वेलफेयर एसोसिएशन
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