गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट का फ्लॉप शो, ट्रैफिक पुलिस 3 गुना बढ़ी; फिर भी 37% बढ़ गए रोड एक्सीडेंट
गाजियाबाद में कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद यातायातकर्मियों की संख्या तीन गुना बढ़ने के बावजूद सड़क हादसों में 2022 की तुलना में लगभग 37% की वृद्धि हुई है।

गाजियाबाद में ट्रैफिक पुलिस बढ़ने के बावजूद रोड एक्सीडेंट बढ़ गए। फोटो: सांकेतिक
HighLights
कमिश्नरेट बनने के बाद यातायातकर्मी तीन गुना बढ़े हैं
सड़क हादसों में 2022 की तुलना में 37% की वृद्धि हुई
शहरीकरण, वाहनों की संख्या और नियमों की अनदेखी मुख्य कारण
विनीत कुमार, गाजियाबाद। गाजियाबाद में यातायात व्यवस्था संभालने और सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए कमिश्नरेट बनने के बाद से यातायात पुलिसकर्मी करीब तीन गुना बढ़े हैं, लेकिन हादसों के आंकड़े इसके उलट कहानी बता रहे हैं।
वर्ष 2022 की जनवरी-अगस्त अवधि की तुलना में इस साल इसी अवधि तक सड़क हादसों में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हादसों में घायल होने वालों की संख्या भी करीब 49 प्रतिशत बढ़ी है।
वर्ष 2022 में गाजियाबाद में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के बाद यातायात व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। यातायात पुलिस में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के साथ निगरानी और प्रवर्तन के लिए तकनीकी संसाधनों का भी विस्तार हुआ।
इसके बावजूद सड़क हादसों की बढ़ती संख्या यह सवाल खड़ा कर रही है कि संसाधन और पुलिस बल बढ़ने के बाद भी सड़क सुरक्षा के मोर्चे पर अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिल रहे हैं।
सड़क पर बढ़ता दबाव भी चुनौती
गाजियाबाद में लगातार बढ़ता शहरीकरण और वाहनों की संख्या सड़क पर दबाव बढ़ा रही है। जनपद में पंजीकृत वाहनों की संख्या 8.83 लाख है। कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर दिनभर वाहनों का दबाव रहता है।
इसके साथ तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही हादसों की प्रमुख वजह बनती है। इसके अलावा अवैध कट, अतिक्रमण, सड़क किनारे खड़े वाहन, पर्याप्त रोशनी का अभाव और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था नहीं होना भी हादसों का खतरा बढ़ाते हैं।
पहले आठ महीनों का हाल
यातायात पुलिस आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में जनवरी से अगस्त तक 562 सड़क हादसे हुए थे। इनमें 242 लोगों की मौत हुई और 402 लोग घायल हुए। इसके बाद हादसों का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया।
2023 में 646 हादसे, 231 मौत और 467 घायल हुए। 2024 में 674 हादसे, 251 मौत और 529 घायल हुए। वर्ष 2025 में हादसों की संख्या बढ़कर 729, मौत 260 और घायल 564 हो गए।
इस वर्ष 31 अगस्त तक 769 सड़क हादसे हो चुके हैं। इनमें 297 लोगों की मौत और 598 लोग घायल हुए हैं। यानी 2022 की तुलना में इस साल अगस्त तक 207 अधिक हादसे हुए हैं। हादसों में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। घायलों की संख्या 402 से बढ़कर 598 हो गई, जो करीब 49 प्रतिशत अधिक है।
वर्ष 2022 से हर साल सड़क हादसों का हाल
| वर्ष | हादसे | घायल | मृत्यु |
|---|---|---|---|
| 2022 | 886 | 638 | 363 |
| 2023 | 991 | 703 | 365 |
| 2024 | 996 | 781 | 381 |
| 2025 | 1097 | 849 | 400 |
| 2026 | 769 | 598 | 297 |
नोट-वर्ष 2026 के आंकड़े जनवरी से 31 अगस्त तक के हैं।
वर्ष 2022 से हर साल बढ़ रहे वाहन
| वर्ष | नए वाहन |
|---|---|
| 2022 | 94,080 |
| 2023 | 102,239 |
| 2024 | 91,835 |
| 2025 | 77,925 |
| 2026 | 33,948 |
| कुल | 400,027 |
नोट-वर्ष 2026 के आंकड़े 31 अगस्त तक के हैं।
सड़क हादसों को रोकने के लिए प्रवर्तन के साथ जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है। हादसा संभावित स्थानों और ब्लैक स्पाट की पहचान कर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। तेज रफ्तार और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सड़क सुरक्षा के लिए वाहन चालकों को भी नियमों का पालन करते हुए जिम्मेदारी से वाहन चलाना चाहिए।
- त्रिगुण बिसेन, डीसीपी ट्रैफिक
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