'अमृत भारत' योजना या 'धूल का जंक्शन', गाजियाबाद स्टेशन पर यात्रियों का सांस लेना मुश्किल
गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पर अमृत भारत योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य के कारण भारी धूल उड़ रही है, ...और पढ़ें

धूल के गुबार में सफर की मजबूरी...गाजियाबाद रेलवे स्टेशन परिसर में कच्ची और धूलभरी सड़क से वाहनों के गुजरने पर उड़ती धूल के बीच अपने बच्चों के साथ गुजरती महिला। अनिल बराल
HighLights
अमृत भारत योजना के निर्माण से गाजियाबाद स्टेशन पर धूल का गुबार।
यात्रियों को सांस लेने में भारी परेशानी, स्वास्थ्य पर बुरा असर।
रेलवे अधिकारियों की लापरवाही से धूल नियंत्रण में कमी।
हसीन शाह, गाजियाबाद। हर साल कुछ विभाग कागजों में प्रदूषण से जंग लड़ते हैं। यही वजह है कि इस जंग में विभागीय अधिकारियों को मुंह की खानी पड़ती है। अगर यही जंग जमीनी स्तर पर कायदे और ईमानदारी से लड़ी जाए तो विजय मिलने की उम्मीद है। सर्दी की दस्तक के साथ फिर से प्रदूषण भी लोगों के सांसों पर मंडराने लग है। सरकारी सिस्टम की लापरवाही प्रदूषण को आमंत्रित कर रही है।
धूल को नजरअंदाज करते रहे रेलवे के अधिकारी
शनिवार को रेलवे स्टेशन परिसर में अमृत भारत योजना के तहत स्टेशन पुनर्निर्माण के दौरान जमा हुई धूल का गुबार ने हजारों यात्रियों को परेशानी में डाल दिया। परिसर से यह धूल प्लेटफाॅर्म तक पहुंच गई।
कई सांस के मरीज धूल से बचने के लिए लंबी दूरी तय कर दूसरे रास्ते से होकर स्टेशन पर पहुंचे। जबकि कुछ लोग धूल के बीच से गुजरने के बाद स्टेशन की दहलीज पर खांसते हुए नजर आए। रेलवे के अधिकारी इस समस्या नजरअंदाज करते रहे।

धूल प्लेटफाॅर्म नंबर एक व दो तक पहुंच गई
स्टेशन को एयरपोर्ट की तरह बनाने के लिए वर्ष 2023 में 350 करोड़ रुपये की अमृत भारत योजना के तहत काम शुरू किया गया था। तीन वर्ष से अधिक समय में महज 30 प्रतिशत ही काम हुआ। ऐसे में रेलवे ने एक माह पहले एजेंसी को हटा दिया।
वर्तमान में काम रुका हुआ है लेकिन तोड़फोड़ के दौरान जमा हुई मिट्टी धूल के रूप में बदल गई है। शनिवार को दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों के अधिक संख्या में गुजरने के दौरान यह धूल प्लेटफाॅर्म नंबर एक व दो तक पहुंच गई।
यात्री और राहगीर हो गए परेशान
स्थिति ये हो गई कि धूल के कारण स्टेशन का एक हिस्सा ठीक से नजर नहीं आ रहा था। धूल के बीच से गुजर रहे लोग भी पहचान में नहीं आ रहे थे। लोगों ने धूल से बचने के लिए नाक और मुंह से रूमाल लगा लिया।
महिलाएं अपने बच्चों को धूल से बचाती हुईं स्टेशन पर पहुंचती हुई नजर आईं। लोगों ने इसकी शिकायत स्टेशन परिसर में तैनात आरपीएएफ के जवानों से की लेकिन उन्होंने इस समस्या को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता दिया। अगर धूल की यही स्थिति रहती है तो आने वाले समय में प्रदूषण को नियंत्रित करना मुश्किल होगा।

इसलिए अचानक बढ़ी धूल...
प्लेटफाॅर्म पर जाने के लिए स्टेशन परिसर से होकर गुजरना पड़ता है। लोग सीधा बैग स्कैनर मशीन के पास तक अपने वाहन लेकर चले जाते थे। आरपीएफ ने बैरियर लगाकर और रस्सी बांधकर स्टेशन परिसर में वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया।
स्टेशन परिसर के पास से माल गोदाम के लिए रास्ता जा रहा है। परिसर की बैरिकेडिंग होने से सभी वाहन माल गोदाम वाले रास्ते से गुजरे। इस रास्ते पर आधा-अधा फीट धूल जमी हुई है। इस रास्ते पर एक साथ वाहनों की संख्या बढ़ने से दिन भर धूल का गुबार बना रहा।
सवाल का नहीं मिला कोई जवाब
वहीं, रेलवे द्वारा इस मार्ग से प्रतिदिन धूल साफ नहीं की जाती और पानी का छिड़काव भी नहीं किया जाता है। मिट्टी को हटाकर और पानी का छिड़काव कर इस समस्या को दूर किया जा सकता है। इस संबंध में रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर और अजय माइकल को फोन और वाट्सएप मैसेज किया गया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

प्रदूषण से निपटना होगा मुश्किल
नगर निगम सहित अन्य विभाग प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभिन्न कदम उठाने का दावा कर रहे हैं। लोगों को विभागों के काम पर भरोसा नहीं है। स्टेशन पर यात्री राजीव कुमार ने बताया कि वह अपने पिता के मुंह पर कपड़ा रखकर प्लेटफाॅर्म तक पहुंचे हैं।
स्टेशन बाहर खड़े यात्री दिनेश राजा ने बताया कि उन्हें धूल से एलर्जी हैं। वह धूल रुकने का इंतजार कर रहे हैं। यात्री जयवीर ने बताया कि धूल के कारण वह अपने माता दूसरे रास्ते से स्टेशन पर लेकर जाएंगे।
पिछले छह वर्ष में अधिकतम प्रदूषण की स्थिति
| वर्ष | एक्यूआई |
| 2020 | 484 |
| 2021 | 485 |
| 2022 | 487 |
| 2023 | 478 |
| 2024 | 467 |
| 2025 | 459 |
यह भी पढ़ें- 30 अजगर, 71 कोबरा, 62 वाइपर, तेंदुआ और मोर का किया रेस्क्यू; गाजियाबाद में 574 वन्यजीवों को बचाया
