गाजियाबाद में पुलिसकर्मी ने किया दुष्कर्म, रिपोर्ट दर्ज न करने पर कार्रवाई के दायरे में आए एसएचओ
गाजियाबाद के टीलामोड़ थाना क्षेत्र में एक युवती से दुष्कर्म के मामले में एसएचओ रवि कुमार बालियान पर कार्रवाई की ...और पढ़ें
-1774981517461_m.webp)
दुष्कर्म के मामले दर्ज न करने पर एसएचओ के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के आदेश।
HighLights
एसएचओ रवि कुमार बालियान पर कार्रवाई की तलवार।
पाक्सो मामले में रिपोर्ट दर्ज न करने का आरोप।
अदालत ने एसएचओ से मांगा सख्त स्पष्टीकरण।
हसीन शाह, गाजियाबाद। टीलामोड़ थाना क्षेत्र में युवती के साथ किशोर अवस्था में आयु में सालों तक दुष्कर्म करने और पॉक्सो के मामले में थाना प्रभारी (एसएचओ) रवि कुमार बालियान द्वारा रिपोर्ट दर्ज नहीं करने पर अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। थाना स्तर पर सुनवाई नहीं करने पर पीड़िता ने अदालत में गुहार लगाई थी।
पहली बार विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) नीरज गौतम की अदालत ने एसएचओ को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश देने की बजाय न केवल उससे स्पष्टीकरण मांगा है, बल्कि एसएचओ को कार्रवाई के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए कहा है।
कानून के तहत पाक्सो की धारा 21 के तहत कोई भी थाना प्रभारी रिपोर्ट दर्ज करने का मना नहीं कर सकता है। रिपोर्ट दर्ज नहीं करने पर थाना प्रभारी काे छह माह तक की जेल हो सकती है। अदालत ने एसएचओ को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
खंडहर बिल्डिंग में ले जाकर युवती से दुष्कर्म
टीला मोड़ थाना क्षेत्र के एक गांव में युवती ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया था कि 14 अप्रैल 2014 को वह भैंस का गोबर फेंकने जा रही थी। तभी रास्ते में उसे गांव में एक युवक ने पकड़ लिया। वह उसे उठाकर खंडहर बिल्डिंग में ले गया। उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बारे में किसी को भी बताने पर धमकी दी।
इसके बाद आरोपित उसके साथ लगातार धमकी देकर दुष्कर्म करता रहा। बाद में आरोपित ने उसे प्रेम प्रसंग के जाल में फंसा लिया। आरोपित ने शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इस बीच आरोपित की नौकरी पुलिस विभाग में लग गई। इसके बाद भी आरोपित ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया।
27 जनवरी 2023 से आरोपित उसके साथ बिना शादी के छपरौला गांव में किराये के मकान में रहने लगा। यहां उसे छोड़कर चला गया और शादी करने से मना कर दिया। पीड़िता ने 10 फरवरी 2025 टीला मोड़ थाने में तहरीर दी। सुनवाई नहीं होने पर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
रिपोर्ट दर्ज का आदेश नहीं, कार्रवाई के दायरे में आएंगे एसएचओ
थाना स्तर से सुनवाई नहीं होने पर पीड़िता ने धारा 156(3) के तहत अदालत से रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई। अदालत ने इस मामले में एसएचओ को एफआइआर दर्ज करने का आदेश देने की बजाय उससे एफआइआर दर्ज नहीं करने का कारण पूछा है। एसएचओ ने अभी तक अदालत को जवाब नहीं दिया। ऐसे नोटिस जारी कर एसएचओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नोटिस में लिखा है कि पाक्सो एक्ट सेक्शन 21 के तहत मामले की रिपोर्ट अभिलिखित नहीं होने पर दंड का प्राविधान है। यदि स्पष्टीकरण नहीं आता है तो क्यों न आपके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए। सुनवाई की अगली तारीख चार अप्रैल 2026 लगाई है। पाक्सो की धारा 21 के तहत रिपोर्ट दर्ज न करना अपराध है। ऐसे में थाना प्रभारी को भी छह माह तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
