गाजियाबाद आरडब्ल्यूए फेडरेशन में पदाधिकारियों की बर्खास्तगी पर गहराया विवाद, फैसले को बताया नियम विरुद्ध
गाजियाबाद आरडब्ल्यूए फेडरेशन में पदाधिकारियों को हटाने और नियुक्तियों को लेकर विवाद गहरा गया है। पूर्व महासचिव प्रीतम लाल ने ...और पढ़ें

आरडब्ल्यूए फेडरेशन में पदाधिकारियों को लेकर गहराया विवाद ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
आरडब्ल्यूए फेडरेशन में पदाधिकारियों को हटाने पर गहराया विवाद।
प्रीतम लाल ने अपनी बर्खास्तगी को नियम विरुद्ध बताया।
कार्यवाहक अध्यक्ष और फेडरेशन अध्यक्ष में मतभेद।
लक्ष्य चौधरी, गाजियाबाद। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) फेडरेशन में पदाधिकारियों को हटाने और नियुक्तियों की वैधता को लेकर विवाद गहरा गया है।
18 अक्टूबर को हुई आम सभा में महासचिव (कार्यकारिणी) प्रीतम लाल और सचिव (कविनगर जोन) राजकुमार त्यागी की सदस्यता समाप्त कर उन्हें पदमुक्त करने का निर्णय लिया गया।
यह फैसला नियमों के अनुरूप
इसके बाद प्रीतम लाल ने कार्रवाई को नियम विरुद्ध बताते हुए स्वीकार करने से इंकार कर दिया। वहीं, कार्यवाहक अध्यक्ष देवव्रत चौधरी ने सदस्यता समाप्त करने के फैसले को नियमों के अनुरूप बताया है।
दूसरी ओर, फेडरेशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने देवव्रत चौधरी के कार्यवाहक अध्यक्ष के अधिकार वापस लेने की बात कही है।
महासचिव (वित्त) महेश चंद्र गौतम के मुताबिक, प्रीतम लाल के स्थान पर महेश चंद गौतम को महासचिव (कार्यकारिणी) और राजकुमार त्यागी के स्थान पर सचिन सोनी को सचिव (कविनगर जोन) का दायित्व अग्रिम निर्णय तक सौंपा गया है।
वहीं, प्रीतम लाल ने कहा कि वह वर्ष 2006 से संस्था के संस्थापक एवं आजीवन सदस्य हैं। 29 जुलाई को हुए चुनाव में वह निर्विरोध महासचिव निर्वाचित हुए थे। उनका आरोप है कि 18 अक्टूबर की आम सभा के लिए निर्धारित समय के अनुसार सूचना नहीं दी गई।
आपातकालीन बैठक कर दी गई थी जानकारी
पत्र के माध्यम से 17 अक्टूबर को बैठक की सूचना आपातकालीन बैठक के रूप में जारी की गई, जबकि अगले दिन इसे आम सभा बताया गया।
उन्होंने बैठक में सदस्यों की उपस्थिति भी बेहद कम होने का दावा किया। प्रीतम लाल ने कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए इसे वैधानिक रूप से स्वीकार करने से इंकार किया है।
इसके अलावा सह-अध्यक्ष देवब्रत चौधरी ने कहा कि नियमों के अनुसार, बिना किसी कारण लगातार तीन बैठकों में अनुपस्थित रहने पर सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। उनके मुताबिक, प्रीतम लाल की बैठकों में अनुपस्थिति के कारण उनकी सदस्यता समाप्त हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि चेयरमैन की अनुपस्थिति में उनके अधिकार एवं कर्तव्य सह-चेयरमैन में निहित होते हैं। इसी आधार पर उन्होंने अपनी भूमिका और कार्रवाई को उचित ठहराया।
अपनी मर्जी से हटाने का अधिकार नहीं
वहीं फेडरेशन के अध्यक्ष आरके गर्ग ने कहा कि संस्था में किसी निर्वाचित पदाधिकारी को अपनी मर्जी से किसी दूसरे पदाधिकारी को हटाने का अधिकार नहीं है। उनके लंदन प्रवास के दौरान उन्होंने देवव्रत चौधरी को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन उनकी गलत गतिविधियों के कारण यह अधिकार वापस ले लिया गया है।
उन्होंने कहा कि संगठन में नियुक्ति और पद से हटाने की प्रक्रिया संस्था के नियमों के अनुसार ही होनी चाहिए।
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