महिलाओं के भरोसे का कत्ल, चंद नोटों में बिकता रहा दहेज पीड़िताओं का इंसाफ; महिला पुलिस पर ही उठे सवाल
गाजियाबाद में महिला उत्पीड़न और दहेज के मामलों में महिला पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। तीन अलग-अलग घटनाओं में, ...और पढ़ें

चंद नोटों के बदले कानून से समझौता किया गया।

समय कम है?
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विनीत कुमार, गाजियाबाद। महिला उत्पीड़न और दहेज के मामलों में पीड़िताओं का सबसे बड़ा भरोसा महिला पुलिसकर्मियों पर होता है। इसी भरोसे को मजबूत करने के लिए गाजियाबाद में पिंक बूथ, महिला थाना, उसकी साहिबाबाद और मुरादनगर रिपोर्टिंग पुलिस चौकियां, एंटी रोमियो स्क्वाॅड और बीते तीन महीनों से चल रहा मिशन शक्ति अभियान मौजूद हैं।
उद्देश्य साफ है, महिलाओं को त्वरित, संवेदनशील और निष्पक्ष न्याय। लेकिन इन्हीं व्यवस्थाओं के बीच सामने आए तीन मामलों ने सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए। तीनों ही केस दहेज उत्पीड़न की जांच से जुड़े हैं। तीनों में महिला पुलिसकर्मी ही जांच कर रही थीं और तीनों में आरोप है कि चंद नोटों के बदले कानून से समझौता किया गया।
केस–1:
दहेज मामले में राहत की कीमत 45 हजार रुपये
महिला दारोगा भुवनेश्वरी सिंह दहेज उत्पीड़न के एक मामले की जांच कर रही थीं। आरोप है कि आरोपित को राहत देने और मुकदमे में नाम हटाने के एवज में पहले एक लाख रुपये मांगे गए, बाद में सौदा 45 हजार रुपये में तय हुआ। शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने ट्रैप लगाया और दारोगा को रंगे हाथ पकड़ लिया। जिस अधिकारी से पीड़िता को निष्पक्ष जांच की उम्मीद थी, वही सौदेबाजी करती नजर आईं।
केस–2:
दो लाख की मांग, 50 हजार में सौदा
20 दिसंबर को मुरादनगर में पिंक बूथ प्रभारी महिला दारोगा प्रिया सिंह और काॅन्स्टेबल शाहिद एंटी करप्शन टीम के जाल में फंसे। मेरठ तहसील में तैनात लेखपाल रजनीश के खिलाफ उनकी पत्नी ने दहेज का केस दर्ज कराया था।
जांच के दौरान दारोगा ने कार्रवाई का डर दिखाकर रजनीश के माता-पिता का नाम हटाने और गंभीर धाराएं हटाने के लिए दो लाख रुपये मांगे। सिपाही शाहिद ने बिचौलिये की भूमिका निभाई और सौदा 50 हजार रुपये में तय हुआ, लेकिन शिकायत के बाद दोनों रंगे हाथ गिरफ्तार हो गए।
केस–3:
दारोगा प्रगति सिंह पर केस डायरी में छेड़छाड़ का आरोप
महिला थाने की पूर्व थानाध्यक्ष दारोगा प्रगति सिंह के खिलाफ बीते वर्ष 16 जुलाई को मसूरी थाने में भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज हुआ। आरोप है कि दहेज उत्पीड़न के एक मामले की विवेचना करते हुए केस डायरी में छेड़छाड़ की गई और बिना साक्ष्य के हत्या के प्रयास की धारा हटाई गई।
यह केस पीड़िता के पिता की याचिका पर कोर्ट के आदेश से दर्ज हुआ। केस दर्ज किए जाने के समय प्रगति सिंह लाइन हाजिर थीं, इसके बाद उनका ट्रांसफर गौतमबुद्धनगर हो गया। छह महीने के बाद भी मसूरी पुलिस ने जांच अधर में लटकाई हुई है।
ट्रैप टीम की शुरुआती जांच में दारोगा के भ्रष्ट होने की जानकारी मिली
महिला दारोगा भुवनेश्वरी को गिरफ्तार करने वाली ट्रैप टीम को शुरूआती जांच में दारोगा के बारे में जानकारी मिली कि वह भ्रष्ट लोक सेवक है। इस मामले में एंटी करप्शन टीम को शिकायत वृंदावन गार्डन निवासी रामपाल सिंह ने की थी। उनके बेटे गौरव की शादी 25 अप्रैल 2024 को नंदग्राम निवासी राखी से हुई थी। शादी के कुछ समय बाद मतभेद होने के कारण राखी अपने मायके में रहने लगी।
बीते वर्ष 16 दिसंबर को राखी ने अपने पति गौरव के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा महिला थाने में दर्ज कराया जिसकी जांच दारोगा भुवनेश्वरी कर रही थी। दारोगा ने उन्हें एवं उनके बेटे को छह जनवरी को महिला थाने बुलाया।
उन्हें बताया गया कि राखी ने अपने बयान में पति समेत अन्य ससुरालियों के नाम भी लिए हैं। यदि वह एक लाख रुपये देंगे तो वह केस में नाम नहीं बढ़ाएगी। रुपये न मिलने पर बयान के आधार पर अन्य लोगों के नाम बढ़ा दिए जाएंगे।
बातचीत आगे बढ़ने पर दारोगा 45 हजार रुपये लेने को तैयार हो गई। रुपये देेने में देरी होने पर दारोगा ने उनके बेटे को धमकाते हुए कहा कि 13 जनवरी तक रुपयों का इंतजाम नहीं होने पर वह अन्य लोगों के नाम मुकदमे में बढ़ा देगी। परेशान हाेकर उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत कर दी।
