गाजियाबाद में झुग्गी बसाने का बड़ा कारोबार, कृषि भूमि पर फसल को दरकिनार कर झुग्गियों को दिया जा रहा खाद पानी
गाजियाबाद में कृषि भूमि पर झुग्गी बसाने का कारोबार तेज़ी से चल रहा है, जहां लोग फसल की जगह झुग्गियों से किराया वसूल रहे हैं।

गाजियाबाद से सटे मटियाला गांव के पास कृषि भूमि पर बनी झुग्गियां। जागरण।
HighLights
कृषि भूमि पर झुग्गी बसाने का कारोबार तेज़ी से फलफूल रहा
फसल से ज्यादा झुग्गी के किराये से हो रही है आमदनी
कबाड़ का कारोबार करने वाले झुग्गियों में रहते हैं
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले के अलग-अगल क्षेत्र में झुग्गी बसाने का बड़े स्तर पर कारोबार चल रहा है। कुछ लोगों अपनी कृषि की भूमि में झुग्गियां बसा दी हैं। इन झुग्गियों से वह किराया वसूल रहे हैं। इनको जितनी आमदनी फसल होती है उससे कहीं ज्यादा झुग्गी के किराये से रही है।
कनावनी की झुग्गियों में आग लगने के बाद सवाल है कि आखिर अवैध रूप से झुग्गी बसाता कौन है। जिन लोगों की भूमि शहर के आसपास है उनमें से कई ने फसल उगानी बंद कर दी है। उन्होंने अपनी भूमि पर झुग्गियां बसा दी हैं। जितनी बचत फसल में नहीं होती है, उससे कई गुना ज्यादा बचत झुग्गी के किराये से होती है।
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मुरादनगर के रावली रोड के पास खाली भूमि पर बनी झुग्गियां। फोटो- जागरण
घर बैठे लाखों रुपये की आमदनी
कई लोग अपने खेत में झुग्गी बनवाने के लिए लोगों को आफर तक देते हैं। उन्हें बिजली व पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का लालच दिया जाता है। उनका कहना है कि खेत में फसल लगाने में मेहनत और मौसम का रिस्क रहता है। जबकि एक झुग्गी से हर माह ढाई से तीन हजार रुपये का किराया मिलता है।
एक एक खेत में 100 झुग्गी बस जाती है तो बिना कुछ किए घर बैठे लाखों रुपये की आमदनी होती है। झुग्गी निजी भूमि पर होती है लेकिन इसका असर निगम की व्यवस्था पर भी पड़ता है। इससे शहर में साफ-सफाई, पानी, प्रकाश आदि की व्यवस्था प्रभावित होती है।
करते है कबाड़ का कारोबार
गाजियाबाद शहर से सटे मटियाला गांव के पास कृषि भूमि पर बननी झुग्गी वालों ने बताया कि वह मूल रूप से असम के निवासी है। वह कृषि भूमि मालिक आरिफ को झुग्गी का किराया देते हैं। आरिफ ने उनसे पानी और बिजली उपलब्ध कराने का वादा किया था, लेकिन वह उपलब्ध नहीं करा पाया।
ऐसे में वह अब किसी दूसरे व्यक्ति के खेत में झुग्गी बनाने की योजना बना रहे हैं। वह यहां पर कबाड़ का कारोबार करते हैं। नगर निगम के कूड़े से प्लास्टिक बीनते हैं। इसके बदले में वह नगर निगम को पैसे देते हैं। कबाड़ से एक व्यक्ति 20 से 25 हजार रुपये लगभग कमा लेता है।
नहीं हैं आग से बचाव के इंतजाम
झुग्गी निवासी अजीमुद्दीन ने बताया कि अगर झुग्गी में आग लग जाती है तो वह पानी से बुझाते हैं। इसके अलावा आग बुझाने के लिए उनके पास कोई इंतजाम नहीं है। वहीं आसपास के लोग झुग्गी बनाने का विरोध करते हैं। वह अपने पास कबाड़ की गंदगी के कारण झुग्गी बसवाना नहीं चाहते हैं। हालांकि सरकारी जमीन से नगर निगम झुग्गी हटा देता है लेकिन निगम निजी भूमि पर बनी झुग्गियों पर कार्रवाई नहीं करता है।
इस तरह लिया जाता है झुग्गी का किराया
| क्षेत्र | दर |
|---|---|
| गाजियाबाद शहरी क्षेत्र | 2000 - 2500 रुपये |
| लोनी क्षेत्र | 1500 - 2000 रुपये |
| मोदीनगर क्षेत्र | 1000 - 1500 रुपये |
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