गाजियाबाद में बिजली चोरी का खुलासा, हर महीने 5 लाख यूनिट बेच निगम को 36.75 लाख की लगाते रहे चपत
कनावनी में बिजली के अवैध कारोबार का पर्दाफाश होने के बाद विभागीय जांच तेज हो गई है। हर महीने लाखों ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI generated
HighLights
कनावनी में अवैध बिजली बेचने का खेल उजागर
हर माह निगम को लाखों की चपत लग रही
जांच रिपोर्ट के बाद होगी दोषियों पर कार्रवाई
राहुल कुमार, साहिबाबाद। इंदिरापुरम के कनावनी की झुग्गियों में अवैध तरीके से बिजली बेचने का खेल छोटा नहीं है। एक तरफ अवैध बिजली बेचकर लोगों से 30 लाख की वसूली की जा रही है तो दूसरी ओर विद्युत निगम को बड़ा चुना लगाया जा रहा है। हर माह पांच लाख यूनिट बिजली झुग्गियों में बेच भ्रष्टाचारी विद्युत निगम को 36.75 लाख की मासिक चपत लगाते रहे।
सूत्र बता रहे हैं कि दैनिक जागरण में इस भ्रष्टाचार का पर्दाफाश होने और लगातार खबरें छपने के बाद विभागीय जांच तेज कर दी गई है। मुख्यालय से भी रिपोर्ट तलब की गई है। अब माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के बाद भ्रष्टाचार में लिप्त विभाग के लोगों के ऊपर जल्द एक्शन लिया जाएगा।
1500 झुग्गियों में चल रहा बिजली बेचने का खेल
कनावनी की करीब 1500 झुग्गियों में अवैध तरीके से बिजली बेचने का खेल किया जा रहा है। इनमें से कुछ झुग्गियां आग की घटना में जल गई हैं। ज्यादातर झुग्गियों में फ्रीज, कूलर, पंखा और एलईडी टीवी चलने के साथ लाइटें जलती हैं। विद्युत निगम के एक अधिकारी ने बताया कि इन उपकरणों को चलाने में हर माह औसत करीब 330 से 370 यूनिट बिजली खर्च होती है। यानी हर झुग्गी में प्रत्येक माह औसतन 350 यूनिट बिजली खर्च हो रही थी।
औसत आंकडा निकालें तो हर माह करीब 5.25 लाख यूनिट बिजली चोरी कर और दिखावे के लिए तीन से चार मीटर लगाकर बेची जा रही है। इससे विद्युत निगम को बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ये पूरा खेल विद्युत निगम के कुछ अधिकारियों व संविदा कर्मी मिलकर करा रहा रहे हैं।
पांच वर्ष में विद्युत निगम को 22.05 करोड़ की लगा दी चपत
जहां एक तरफ अवैध तरीके से बिजली बेचकर 30 लाख हर माह की वसूली की जा रही थी। वहीं, दूसरी ओर इस वसूली को करने के लिए विद्युत निगम की हर माह 36.75 लाख की बिजली बेची जा रही थी। यानी बीते पांच वर्ष में करीब 3.15 करोड़ यूनिट बिजली बेचकर 22.05 करोड़ की विद्युत निगम को चपत लगा दी।
कार्रवाई से बचने के जुगाड़ लगा रहे शामिल अधिकारी
18 अप्रैल को जांच कमेटी गठित करते हुए अधिशासी अधिकारी अजय कुमार और शिवांगी को जिम्मेदारी दी गई थी। तीन दिन से मामले की जांच जारी है। विद्युत निगम के एक उच्चाधिकारी ने बताया कि इसमें कई अधिकारियों के नाम आ रहे हैं। अगर निष्पक्ष जांच रिपोर्ट दी गई कड़ी कार्रवाई होगी। हालांकि बिजली बिकवाने में शामिल अधिकारी अभी बचने के जुगाड़ लगा रहे हैं।
