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बीमा क्लेम न मिलने पर डॉक्टर पर लगाए फर्जी आरोप, गाजियाबाद कोर्ट ने याचिका खारिज की

Published: Tue, 27 Oct 2026 01:16 PM (IST)

गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल में बीमा क्लेम न मिलने पर एक मरीज ने डॉक्टरों पर झूठे आरोप लगाए। अदालत ने ...और पढ़ें

बीमा क्लेम न मिलने पर डॉक्टर पर लगाए फर्जी आरोप  ( एआई जेनरेटेड इमेज )

बीमा क्लेम न मिलने पर डॉक्टर पर लगाए फर्जी आरोप ( एआई जेनरेटेड इमेज )

HighLights

  1. बीमा क्लेम न मिलने पर मरीज ने लगाए झूठे आरोप।

  2. गाजियाबाद मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों पर लगे थे आरोप।

  3. अदालत ने जांच के बाद याचिका को किया खारिज।

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। मैक्स अस्पताल में इलाज कराने गए एक व्यक्ति को जब इश्योरेंस कंपनी से क्लेम के पैसे नहीं मिले, तो उन्होंने डाक्टर और अस्पताल के स्टाफ पर गंभीर आरोप लगा दिए।

आरोप लगाया कि ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर उन्हें बेहोश किया, लेकिन उनका घुटना नहीं काटा और आपरेशन किए बिना ही कह दिया कि इलाज हो गया है। अदालत की जांच में सारा सच सामने आ गया। अदालत ने शिकायतकर्ता की याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

ऑपरेशन के नाम पर डॉक्टर ने जमा कर लिए पैसे 

वैशाली इलाके में स्थित मैक्स अस्पताल में शिकायतकर्ता अपने घुटने का इलाज कराने गए थे। उनका आरोप था कि डॉक्टर ने ऑपरेशन के नाम पर उनसे पैसे जमा करवा लिए।

इलाज नहीं करने का विरोध करने पर अस्पताल के लोगों ने उनके साथ मारपीट की और धमकी दी। अदालत में जब इस मामले की जांच हुई तो अस्पताल के टीपीए (बीमा देखने वाले विभाग) के हेड डा. दानिश और अन्य लोगों ने बिल्कुल अलग कहानी सामने रखी।

असल विवाद बीमा पैसों का था

उन्होंने बताया कि असल विवाद बीमा के पैसों का था। वादी चाहते थे कि डॉक्टर कोई ऐसी रिपोर्ट बना कर दे दें, जिससे उनकी बीमा कंपनी से उन्हें भारी-भरकम क्लेम का पैसा मिल जाए। अस्पताल के अधिकारियों ने नियमों के तहत सही रिपोर्ट बीमा कंपनी को भेज दी। लेकिन, बीमा कंपनी ने क्लेम पास करने से मना कर दिया।

उन्होंने आगे बताया कि इसी बात से नाराज होकर वादी ने टीपीए हेड और डॉक्टरों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वे गलत रिपोर्ट भेजकर किसी तरह क्लेम पास करवाएं। जब डाक्टरों ने गलत काम करने से मना कर दिया तो वादी ने उन पर और यहां तक कि मामले की जांच करने वाले सीएमओ और एमएमजी अस्पताल के डाक्टरों पर भी झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए।

सारे आरोप बेबुनियाद साबित हुए 

इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में हुई। अदालत ने पुलिस, मुख्य चिकित्सा अधिकारी और एमएमजी अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टरों द्वारा की गई जांच रिपोर्ट को बहुत गौर से देखा। जांच में यह साफ हो गया कि डॉक्टर अखिलेश यादव और अस्पताल के किसी भी कर्मचारी की तरफ से कोई गलती या लापरवाही नहीं हुई थी।

डाक्टरों पर लगाए गए सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद साबित हुए। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी डाक्टर पर बिना पक्की और गंभीर लापरवाही के सबूत के आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।

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