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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नोएडा तक सीधी कनेक्टिविटी, गाजियाबाद में एलिवेटेड रोड-फ्लाईओवर बनाने की तैयारी

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:00 AM (IST)

गाजियाबाद के लालकुआं में यातायात जाम से राहत के लिए एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर कनेक्टिविटी की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

गाजियाबाद में एक और एलिवेटेड रोड की तैयारी। फोटो: आर्काइव

गाजियाबाद में एक और एलिवेटेड रोड की तैयारी। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. लालकुआं में जाम से राहत के लिए नए प्रस्ताव

  2. भाटिया मोड़ से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक एलिवेटेड रोड

  3. ठाकुरद्वारा फ्लाईओवर को चार लेन करने की संभावना

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। लालकुआं और आसपास के क्षेत्रों में जाम से राहत दिलाने के लिए एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर की कनेक्टिविटी विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

सोमवार को जीडीए और NHAI के अधिकारियों ने प्रस्तावित मार्गों का स्थलीय निरीक्षण किया। हालांकि, अभी परियोजना को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। फिलहाल तकनीकी व्यवहार्यता जांचने और निर्माण में आने वाली बाधाओं को चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है।

एलिवेटेड रोड और फ्लाईओवर की कनेक्टिविटी पर विचार

जीडीए अधिकारियों के अनुसार भाटिया मोड़ से पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस तक करीब तीन किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाने पर विचार किया जा रहा है।

इसके साथ ठाकुरद्वारा के मौजूदा फ्लाईओवर को करीब एक किमी तक चार लेन का कर भाटिया मोड़ से जोड़ने की संभावना भी तलाशी गई।

आरओबी के आगे डबल डेकर फ्लाईओवर के जरिये दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के ऊपर से नोएडा तक कनेक्टिविटी विकसित करने की परिकल्पना पर भी चर्चा हुई।

जीडीए उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद तकनीकी निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। अभी बजट, अंतिम डिजाइन, टेंडर और निर्माण शुरू होने की समयसीमा स्पष्ट नहीं है।

परियोजना का उद्देश्य लालकुआं के आसपास यातायात का दबाव कम करना और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कनेक्टिविटी विकसित करना है। इस मौके पर जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्र और मुख्य अभियंता आलोक रंजन आदि जीडीए अधिकारी उपस्थित रहे।

मंजूरी और निर्माण की समयसीमा तय नहीं

जीडीए सचिव, प्रभारी मुख्य अभियंता और NHAI के अधिकारियों ने मार्ग का निरीक्षण कर तकनीकी पहलुओं पर विचार किया। अब विद्युत विभाग, यूपीसीडा, NHAI और अन्य संबंधित विभागों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें यूटिलिटी शिफ्टिंग और निर्माण में आने वाली बाधाओं पर चर्चा होगी।

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