गाजियाबाद में पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने पर कोर्ट ने पति को सुनाई 20 साल की सजा
गाजियाबाद में विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति राहुल अग्रवाल ...और पढ़ें

दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने पर पति को 20 साल की कठोर सजा।
HighLights
पति को दहेज उत्पीड़न, आत्महत्या उकसाने पर 20 साल की सजा।
दहेज की मांग, जातिसूचक टिप्पणियों से प्रताड़ित थी पीड़िता।
अदालत ने राहुल अग्रवाल को दोषी ठहराया, मुआवजा देने का निर्देश।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। वर्ष 2018 के दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में विशेष न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने पति को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि आरोपित द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ना और अपमानजनक व्यवहार के कारण ही पीड़िता ने आत्महत्या का कदम उठाया।
अभियोजन के अनुसार नेहा इंदिरापुरम क्षेत्र के एक अनुसूचित परिवार से थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उसके माता-पिता ने उसकी शादी अच्छे घर में करने की कोशिश की थी। नेहा और राहुल अग्रवाल की शादी 10 अप्रैल 2018 को कोर्ट में हुई थी। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन कुछ ही समय बाद आरोपित और उसके परिवार का व्यवहार बदल गया।
नेहा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि राहुल और उसके स्वजन ने दहेज में कार, कैश और आभूषण की मांग शुरू कर दी थी। मांग पूरी न होने पर नेहा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। इतना ही नहीं, आरोपित द्वारा जातिसूचक टिप्पणी कर नेहा और उसके परिवार को अपमानित भी किया जाता था।
लगातार हो रहे उत्पीड़न से परेशान होकर नेहा मानसिक रूप से टूट गई। शादी के करीब ढाई माह बाद 25 जून 2018 को उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मृतका के माता-पिता, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों समेत कुल 12 गवाह अदालत में पेश किए।
राहुल को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा
गवाह के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने माना कि आरोपित द्वारा दहेज के लिए प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध साबित होता है। इसी आधार पर अदालत ने आरोपित राहुल को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने निर्देश दिया कि वसूल की गई जुर्माने की राशि पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
